सूचना आयोग का जिला कलक्टर को नोटिस

  • शिक्षक प्रतिनियुक्ति की सूचना नहीं देने पर लिया संज्ञान
  • दो दो दशक से दफ्तरों में बाबूगिरी कर रहे कई शिक्षक

मिरर न्यूज। विद्यालय छोड़कर कई शिक्षक जिला निर्वाचन शाखा, कलक्ट्री के साथ तहसील व उपखंड कार्यालय, आपदा प्रबंधन में बाबू का कार्य कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार द्वारा प्रतिनियुक्ति पर प्रतिबंध लगा रखा है। फिर भी कार्य व्यवस्था की आड़ में जिला प्रशासन द्वारा दर्जनों शिक्षकों को दफ्तरों में लगा दिया। इस तरह जिला प्रशासन और शिक्षा महकमे का झूठ खुलकर सामने आ गया। सूचना के अधिकार के तहत शिक्षक प्रतिनियुक्ति की सूचना अधूरी देने पर राज्य सूचना आयोग द्वारा जिला कलक्टर (जिला निर्वाचन अधिकारी)को नोटिस जारी करते हुए 26 नवम्बर 2019 को जयपुर तलब किया है। इससे शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति में प्रशासनिक मिलीभगत की पोल भी खुलकर सामने आ गई।
जानकारी के अनुसार 22 अपे्रल को जिला निर्वाचन कार्यालय के साथ जिलेभर में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शिक्षकों की सूचना मांगी गई। जिले के सभी निर्वाचन कार्यालय में शिक्षक का नाम, मूल पदस्थापन स्थल (विद्यालय का नाम) व प्रतिनियुक्ति की समयावधि की सूचना मांगी गई। व राज्य सरकार, शिक्षा विभाग द्वारा इनको प्रतिनियुक्ति पर लगाने के आदेश की प्रति भी मांगी गई थी। इसके बावजूद जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर द्वारा वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि उनके कार्यालय में ही कई शिक्षक बतौर लिपिक के पद पर कार्यरत है। इसी तरह 7 जुलाई 2017 को शिक्षक प्रतिनियुक्ति की सूचना मांगी गई थी। प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा सूचना को सृजित करने का प्रावधान नहीं होने का बहाना बनाते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया। इसका मुख्य कारण शिक्षक प्रतिनियुक्ति के प्रमाणित दस्तावेजों से शिक्षा विभाग और प्रशासनिक झूठ खुलकर सामने आ जाता। साथ ही जिला निर्वाचन विभाग द्वारा शिक्षक गिरीश देवड़ा की प्रतिनियुक्ति 19 जून 2018 से बताई, जबकि वह करीब 15 साल से प्रतिनियुक्ति पर चल रहा है। हालांकि प्रतिवर्ष एक दिन के लिए विद्यालय ज्वाइन कर फिर दूसरे दिन प्रतिनियुक्ति पर जिला कलक्ट्री में आ जाते हैं। इस तरह शिक्षकों के प्रतिनियुक्ति का खेल लंबे समय से चल रहा है, जिसमें शिक्षा विभाग के साथ जिला प्रशासन की भी मिलीभगत है।
21 दिन में सूचना देने के आदेश
राज्य सूचना आयोग द्वारा शिक्षक प्रतिनियुक्ति की सूचना नहीं देने पर जिला निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए 21 दिन में वांछित सूचना उपलब्ध कराने के आदेश दिए। साथ ही सूचना संबंधी समस्त अभिलेखों के साथ 26 नवम्बर 2019 को सुबह 11 बजे कोर्ट नम्बर 3 में उपस्थित होने के आदेश दिए गए हैं। सूचना आयोग द्वारा स्पष्ट चेतावनी दी गई कि अगर तय समयावधि में सूचना नहीं देने पर सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20 के तहत दंडित किए जाने का सख्त प्रावधान है।

बाबूगिरी का चस्का, फिर क्यो बने शिक्षक
कतिपय शिक्षकों को दफ्तरों में बाबूगिरी करने का चस्का है, जिससे उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं आखिर वे शिक्षक ही क्यों बने? दूसरी तरफ ऐसे कतिपय शिक्षकों को ही दफ्तरों में बाबू क्यों लगाते हैं? इससे ऐसे शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने की बजाय दफ्तर में प्रतिनियुक्ति पर लगने के पीछे उनकी क्या मंशा है? इस तरह के कई अनसुलझे सवालों की वजह से ही शिक्षा विभाग के साथ जिला प्रशासन की भूमिका संदेह के दायरे में है। उल्लेखनीय है कि जिले में कोई प्रतिनियुक्ति नहीं होने को जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक एवं जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक द्वारा शपथ पत्र शिक्षा निदेशालय को प्रस्तुत कर रहे हैं और दूसरी तरफ कई शिक्षक प्रतिनियुक्ति है। इससे उनके द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र का झूठ भी उजागर हो गया।
कार्य मुक्त नहीं होने वाले शिक्षको का वेतन रोकने का आदेश
शिक्षा विभाग के शिक्षकों को अतिशीघ्र कार्य मुक्त कर अपना पद स्थापन स्थान पर जाने के लिए सिरोही ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी समग्र शिक्षा ने प्रमुख शासन सचिव के प्रपत्र का हवाला देकर जिले में प्रतिनियुक्ति पर लगे शिक्षको को कार्यमुक्त नहीं होने पर जुलाई माह का वेतन जारी करने का आदेश जारी किया है। सिरोही के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी समग्र शिक्षा अभियान के भंवरसिंह ने बताया कि ऐसे शिक्षक व कार्मिक को जो गैर शैक्षिक कार्यो के लिए अन्य कार्यालय व विभाग में लगे हैं एवं उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया हैं उनके माह जुलाई 2019 का वेतन आहरित नहीं करने का जिले के समस्त प्रधानाचार्य को निर्देशित किया हैं साथ ही ऐसे शिक्षक व कार्मिको को अविलम्ब मूल पद स्थापन स्थान पर कार्यग्रहण करने का आदेश जारी किया है।
जिला कलेक्टर का भी आदेश
सिरोही जिला कलेक्टर सुरेन्द्र कुमार सोलंकी ने जिले के विभिन्न कार्यालयों में प्रतिनियुक्त कार्यरत् शिक्षको को कार्यमुक्त करने के संबंध में आदेश दिए है। विभिन्न शिक्षक संगठनों की मांग पर जिले के विभिन्न कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे शिक्षकों को अतिशीघ्र मूल पद स्थापन पर भेजने के लिए ज्ञापन प्रस्तुत किया है जिसके संबंध में जिला कलेक्टर ने आदेश जारी किए है। जिला कलेक्टर ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिरोही, उपखण्ड़ अधिकारी सिरोही-शिवगंज, आबू-पिण्ड़वाड़ा, रेवदर एवं विकास अधिकारी पंचायत समिति, सभी तहसीलदार को निर्देश प्रदान किया है।
इन विभागो में शिक्षक कर रहे है बाबूगिरी
जिले के अनेक कार्यालयो में शिक्षक बाबू बनकर बाबगिरी कर रहे हैं ये शिक्षक संबंधित कार्यालयों में मंत्रालयों के सहयोगी बनकर केवल इसलिए बैठे है कि विद्यालयों में पढऩे के काम से बच सकें। जबकि शिक्षकों अपने पवित्र पेशे से जी चुराकर अन्य विभागो में प्रतिनिधि पर कई शिक्षक कार्यरत् हैं। जिले के ऐसे शिक्षक भी हैं जो कि करीब 10-15 वर्ष से शिक्षा विभाग से दूर रहकर अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे है। सिरोही के चुनाव कार्यालय, जिला कलेक्टर निवास स्थान, आपदा प्रबंधन, खेल विभाग इत्यादि में लम्बे समय से कार्यरत् है। ना ही इन शिक्षकों को छात्रो की शिक्षा की गुणवता के प्रति गम्भीर हैं न ही ये शिक्षक विद्यालय में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेते है। जिले का महत्त्वपूर्ण पदों पर बैठने वाले अधिकारियों का भी ध्यान इनकी ओर नहीं जा रहा है।

सिरोही मिरर ने अगस्त 2018 के अंक में प्रकाशित की थी यह खबर

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