सात जन्मों का बंधन आखिर क्यों कचहरी तक?

सात जन्मों के इन रिश्तों में आखिर यह कडवाहट क्यों? क्यों रिश्तों में दूरिया बढ़ती जा रही है ? आखिर क्यों थानों और कचहरी तक जाने की नौबत आ पढती हैं। जन्म जन्म का सात निभाने वाले जोडे क्यों चंद महीनों का भी साथ नहीे निभा पा रहे? जानिए एक विशेष रिपोर्ट….


पति-पत्नी का रिश्ता त्याग,प्रेम और विश्वास का हेाता है। शादीशुदा जीवन का रिश्ता एक अटूट बन्धन होता है, लेकिन वर्तमान के विवाहेत्तर संबंधो में आए दिन कलहबाजी या झगडे फ साद के बारे में आपने सुना होगा, आखिर ऐसो क्यों है, कि अपने साथ सात फेरे लेने वाला साथी के साथ सात जन्मों का साथ देने के बदले सात महीने में ही रिश्तों में दरार आ जाती है। माना जाता है कि पति-पत्नी परिवार की गाडी के दो पहिए है, यदि एक भी पहिया खराब या बिगड जाए तो जिंदगी रूपी इस गाडी का चलना मुश्किल हो जाता है। विवाह बन्धन कोई खेल नही होता है। यह रिश्ता कुछ समझौते और बलिदान मांगता है , जिसके बदले में आपको प्यार करने वाला मिलता है। लेकिन जब छोटी-छोटी बातों पर अंर्तकलह करते है तो यह कलह पूरे घर को बर्बाद कर देती है। छोटा क्लैश घर से निकल कर जब थाने या कचहरी तक पहुंचता है तो आपको ये छोटा कलह आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान तो करता ही है वरन इसका असर अपने आने वाली पीढी पर भी पढता है। इस लडाई में घर का तीसरा सदस्य यानि उनकी संतान मानसिक रूप से प्रताडित होती है। आखिर इन छोटी-छोटी वजहों से जीवन भर के रिश्तों में क्यों दरार आ जाती है। क्यों हो जाते है इन छोटी-छोटी बातों से पति-पत्नी के बीच मन-मुटाव? क्या इन्हे रोका या संभाला नही जा सकता। लोकल स्तर से लेकर बडे कोर्ट या फैमेली कोर्ट में ऐसे लाखो केस चल रहे है। तो क्या इन लोगों के रिश्तों में कलह या झगडे का कोई एक कारण तो नही हो सकता है, आखिर क्या वे कारण है, जो हंसते -खेलते परिवार को गर्त की ओर ले जाते है।
क्या है झगडे का कारण
अहंकार या इगो –
पति-पत्नी के जीवन में कलह की समस्या की शुरूआत अहम (इगो) से होती है। छोटी-छोटी बात और जरूरत पूरी न होने पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। जो क्लैश का कारण बनता है।
घर की जिम्मेदारी महिला पर होने पर-
यदि परिवार की जिम्मेदारी महिला जीवन साथी के ऊपर निर्भर होती है तो इसमें अहम (इगो) कलह का कारण बनता है। पुरूष साथी अपने साथी के सामने अपने आप को निम्न समझता है वही काम की वजह से परिवार को पूरा समय न दे पाने के चलते पती-पत्नी में कहासुनी होती है।
वित्तीय संकट फाइनेंसियल क्राइसिस)-
झगडे की सबसे मुख्य और ठोस वजह है रूपये। खासतौर पर उन परिवार में इससे ज्यादा समस्या बढ जाती है, जिनकी आमदनी अट्ठनी और खर्चा रूपया होता है।

जरूरत से ज्यादा की चाहत-
जरूरत से ज्यादा और समय से पहले की चाहत भी फैमेली कलह का एक बडा कारण होता है। जैसे परिवार के एक किसी एक व्यक्ति (पर्सन)की डिमांड जरूरत से ज्यादा बढ जाती है।
अलग रहने की चाहत-
अलग और अकेले रहने की चाहत मेंं भी फैमिली की शांती भंग हो जाती है। काउंसिलिंग सेल में कई ऐसे केस आते है जिनमे लडकी ससुराल में रहने की जगह पति के साथ अलग से रहना चाहती है, जिसे लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू होती है और बात बिगडकर झगडे तक पहुंच जाती है।
ससुराल और मायके का दखल-
मैरिज कपल के बीच ससुराल और मायके पक्ष का इंटरफे यर बढने पर दोनों परिवार के लोग अपनी सोच और प्रथा एक दूसरे पर थोपते है।
पुराने रिवाज और आदर्श (आइडियल) बहु-
आज समय में पुराने रिवाज और आइडियल बहु की सोच के चलते रिश्ते ज्यादा बिगड रहे है। दूसरे कल्चर में जाकर शादी करने के बाद अपने कल्चर को मनवाना और आदर्श बहु की सोच पूरी न होने से भी परिवार में विवाद शुरू हो जाता है।
घर में शराब या मादक पदार्थो का इस्तेमाल
अक्सर लडाई की जड शराब या नशाखोरी होती है। जिससे घर का माहौल तनावपूर्ण होता है। मादकता के चलते घर में लडाई-झगडों की फेहरिस्त बढ जाती है और मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है।
अवैध सम्बंध का होना
पती-पत्नी का श्तिा प्यार का रिश्ता होता है, एक विश्वास का रिश्ता होता है। यदि यह विश्वास टूट जाए तो संभव है कि रिश्ता भी टूट सकता है। घर कलह की एक ओर मुख्य वजह होती है अवैध सम्बंध। शादी से पूर्व के प्रेमी- प्रेमिका से अपने संम्बंध जारी रखना , शादीशुदा जीवन के लिए खतरा होता है। वही शादीशुदा होते हुए भी विपरित लिंग से अवैध संबंध रखना, कोर्ट या कचहरी जाने के लिए काफी है।

कैसे हो सोल्यूशन
पारिवारिक विवाद के मामले साल दर साल बढते ही जा रहे है। कचहरी में ऐसे केसो की संख्या भी बढ रही है। इनमें शहर और गांवो में अलग-अलग तरीके के मामले होते है। इसलिए इसका हल निकालने के लिए अपनी अंडर स्टेडिंग को एकरूपता में लाना होगा। घर में किसी भी मादक पदार्थ का इस्तेमाल कम या बंद ही कर देना चाहिए। अपनी अपेक्षाओं को कम कर दिया जाए, और दोनों पक्षों की सोच को एक दूसरे से मिलाया जाए तो झगडे कम होंगे।
बच्चों पर तलाक का असर
वैवाहिक जीवन में जब दंपती के बीच अधिक घरेलू कलह बढ जाता है तो बात तलाक तक पहुंच जाती है। तलाक का असर हालांकि दोनों दंपतियों पर जरूर पडता है लेकिन यह असर अधिक पीडादायक तब बनता जब दंपती की कोई संतान हो। तलाक के बाद अधिकांश समय बच्चा या तो माता के साथ रहता या फिर पिता के पास। उसका एक नया घर होता, उसकी नई स्कूल और नये साथी होते है, मगर उसकी पीडा कोई समझ नही पाता कि वो दोनों को साथ देखना चाहता है। नाजुक मन के बच्चे पर तलाक का बुरा प्रभाव पडता है। लडकों में विद्रोही और आक्रमक व्यवहार उत्पन्न हो जाते है वही लडकिया चिंतित व चुप रहती है। तलाक का प्रभाव बच्चों में कई नकारात्मक प्रवृत्तियो को जन्म देता है जैसे कडवाहट, भावनात्मक दर्द, चिंता, भय आदि। यह कहना गलत नही होगा कि इससे बच्चा माता-पिता के प्यार के बिना कई गलत प्रवृत्तियों के बीच फंस जाता है। दोनों के कलह के बीच बालमन किस तरह तडफता है ,उसकी व्यथा का दुख कोई समझ नही पाता। उसकी सोच में या हमेशा सपनों की दुनिया में वो माता-पिता दोनों को एक साथ देखना चाहता है, मगर यथार्थ कुछ और ही होता है। इसलिए पति-पत्नी को प्रयास यही करना चाहिए कि जहां तक हो कलह को टाले, तथा आपसी समझ से समस्या का हल ढूंढे। तभी आपका वैवाहिक जीवन संतान सहित खुशनुमा होगा, हसीन होगा।

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