साक्षात कमल स्वरूप थे कमल विजय महाराज

परम पूज्य गुरूदेव कमल विजयजी महाराज साहब का स्वरूप देव तुल्य के समान है, इसका साक्षात अनुभव वहीं कर सकता है, जो इनका दर्शन करंे। इस युग पुरूष में ऐसा आध्यात्मिक आकर्षण है, जिसकी भक्ति समर्पण भाव से की जाए तो वह ईश्वरत्व को प्राप्त कर सकता है। गुरूदेव परोपकार की प्रतिभूति है। उनके लिए धन का स्पर्श त्याज्य है अर्थात, उसे छूते तक नहीं। भक्तो की संख्या इतनी व समर्पित हंै कि उनकी सूची अंतहीन है। उनके पास जो कुछ आया, उसे तुरंत अलग-अलग क्षेत्रो में उपयोग करवा दिया। मंदिर, धर्मशाला, सर्वधर्म, आवास गृह जरूरतमंद की तन-मन-धन से सेवा ‘साधु सेवाÓ शरणागत की इच्छा पूर्ति जैसे अनेक कार्य क्षेत्र है जो गुरूदेवजी के जीवन लक्ष्य के प्रतीक है व मानव के लिए परोपकार की श्रेणी में आते है। गुरू का जीवन पारदर्शी कांच के सदृश रहा है। वह जैसे भीतर है वैसे ही बाहर भी। जहां अन्तो तहा बाहि, जहां बाहि तहा अन्तो। इनकी वाणी में व्यवहार सात्विकता, तेजस्विता व सहजता की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। यह प्रदर्शन व प्रचार से कोसो दूर है। इनके जीवन में अमीर गरीब, जाति पंथ का तनिक भी भेदभाव दिखाई नही देता। इस युग के क्रांतिकारी जीवन दृष्टा है। जब कभी भक्तों को गुरूदेव की याद आती है तब बामणवाडजी पहले याद आता है। जो राजेन्द्र नगर नाम से विख्यात है। नि: सन्देह जहां गुरू आचार्य देव श्री राजेन्द्र सूरिजी का अस्तित्व है। आचार्य श्री राजेन्द्रसूरि के शिष्य रत्न आचार्य श्री धनचंदसूरिजी के शिष्य तपोनिध साहित्यचार्य श्री तीर्थेन्द्र सूरीश्वरजी का बामणवाडजी प्रिय आराधना स्थल रहा है। अर्बुदाचल में स्थित बामणवाडजी में तपस्यारत श्री तीर्थेन्द्रसूरीजी ने कालान्तर में इसे अपना कर्मक्षेत्र बना लिया। विहार के दिनों को छोडकर शेष जीवनकाल को आपने यही स्थाई आवास के रूप में बना लिया था। यहीं पर अपने दोनों शिष्य रत्नो को जीवन संघर्ष की रूपरेखा बताई। सर्तक व बुद्धि कौशल मुनिराज श्री कमल विजय ने अपने गुरू की वाणी , शिक्षा, कर्म को हृदयगम करते हुए दिल में एक ठोस निश्चय कर लिया था कि ईश्वरत्व प्राप्त गुरूदेव की इच्छाओं की पूर्ति के लिए उन्होंने यहीं से अपनी कर्मयात्रा प्रारम्भ करने का सोचा। गुरूदेव के देवलोक गमन के बाद मुनिराज श्री कमलविजयजी ने अपनी सद्कर्म यात्रा इसी स्थान से गुरूदेव की साक्षी में प्रारम्भ की। गौरतलब है कि गुरूदेव श्री तीर्थन्द्रसूरजी महाराज ने बामनवाडजी में ही अपनी अंतिम श्वास छोडी थी। अत: मुनिराज ने प्रथम लक्ष्य यही बनाया कि बामणवाडीजी में गुरू समाधि मंदिर का निर्माण तुरंत होना चाहिए ताकि लोगो की स्मृति को सजीव रखा जा सके। आप द्वारा यही से विभिन्न गांवो में चातुर्मास आयोजित कर भक्तो को प्रेरित किया व देखते ही देखते यहां गुरू समाधि मंदिर निर्मित हो गया। इसी मंदिर मेंं श्री राजेन्द्रसूरीजी, श्री धनचंदसूरीजी व समाधिस्थ गुरूषर्थ श्री तीर्थेन्द्र सूरीजी की मूर्तिया प्रतिष्ठित है। इसके अलावा यहां चमत्कारी श्री शंखेश्वर पाश्र्वनाथ भगवान की मूर्ति भी है। बामणवाडा में मां आशापुरी माताजी का भव्य मंदिर निर्मित कर उसे प्रतिष्ठित किया गया है। निकट पहाडी पर छत्तीस कौम के आराध्य देव रामदेवजी का मंदिर भी है। साथ ही रामभक्त हनुमान मंदिर भी स्थित है। विख्यात तीर्थ सिरोही से 18 किमी दूरी पर है, वही सिरोही रोड से आठ किमी दूर है। यह सिरोही, जोधपुर, अहमदाबाद, मुम्बई बेंगलोर रेलमार्ग से जुडा तीर्थ है।
राठौडवंश में जन्मे गुरूवर कमल विजयजी महाराज
मध्यप्रदेश का झाबुआ नगर चारों और प्राकृतिक सौन्दर्य व पर्वतों की उपत्यका में बसा हुआ है। यहां के महान राठौड वंशीय गुलाबसिंह अपनी धर्मपत्नी श्रीमती रतनकंवर के साथ सुखपूर्वक निवास करते है। रतन कंवर ने विक्रम संवत 1988 माहसूद 13 को अपनी दूसरी संतान के रूप में एक सुन्दर सलोने पुत्र को जन्म दिया जिसका नामकरण जवानसिंह रखा। इनसे बडे भ्राता का नाम अमरसिंह था।
कहा जाता है कि समय कभी एक समान नहीं होता, कभी सुख तो कभी दु:ख हमारे जीवन में आता-जाता है। कुछ समय पश्चात जन्मदात्रि मामात रतन कंवर का निधन हो गया। उस समय दोनों भाई बाल अवस्था में थे। गुलाबसिंह अपनी पत्नी के वियोग में अस्वस्थ रहने लगे। दोनों पुत्र ही उनके जीवनाधार थे। बीमार के कारण उनके पिता का भी स्वर्गवास हो गया जिसके चलते दोनों आश्रयविहीन हो गए। जो परिवार कुछ दिन पहले खुशहाल था उस परिवार के दो बालक आलम्बन विहीन हो गए। इन दिनों आचार्य श्रीमद विजय तीर्थेन्द्र सुरीश्वरजी म.सा. का इस क्षेत्र में विचरण होता रहता था। इस दौरान 3 वर्षीय बालक श्री जवानसिंह को आचार्य श्री तीर्थेन्द्र सुरेश्वरजी महाराज की शरण मिली। उन्हें गोद में लेकर आचार्य श्री ने कहा कि भविष्य में यह बालक एक महान संत बनेगा। वे गुरूदेव के साथ रहते हुए अध्ययन करने लगे। समय गुजरा विक्रम संवत 2003 में धानेरा (गुजरात) में माह सूद 13 के दिन हीरालाल मूलचंद शा परिवार की ओर से आचार्य श्री तीर्थेेन्द्रजी महाराज साहब ने उन्हें दीक्षा दी। जहां इनका नाम ‘कमलविजयÓ पडा। गुरू प्रेम से ‘कालिया बाबाÓ भी कहने लगे। आचार्य श्री तीर्थेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज के साथ दोनो गुरू भाई श्री लब्धिविजय एवं श्री कमल विजयजी ने साथ-साथ विभिन्न गांवों का विहार किया व धर्म का उपदेश दिया। आचार्य तीर्थेन्दसूरीश्वरजी के देवलोक गमन होने पर इनके दोनो शिष्यों ने संकल्प लिया कि वे श्री गुरूदेव के बताए मार्ग पर चलेगे और इनके अधूरे कार्य को पूर्ण कर उनका नाम रोशन करना। आचार्य श्री कमलविजयजी महाराज साहब ने निम्न कार्य सम्पन्न करवाए, जिसमें बाणवाडजी में समाधि मंदिर, पालीताणा में सौधर्म निवास, जैन मंदिर गुरू मंदिर धर्मशाला, झाबुआ, भीनमाल में गुरू मंदिर, बाकरा रोड में महान तीर्थ आदि। इसके अलावा कई कार्य करवाए। माउंट आबू में जैन मंदिर का शिलान्यास भी करवाया। आहोर में हेमेन्द्र विजयजी महाराज साहब को आचार्य पदवी देने में श्री कमलविजय जी महाराज साहब ने मुख्य भूमिका निभाई।
गुरूवर का जन्मोत्सव 20 को
गुरूवर के मस्तिष्क पर चमक देख दु:खी भक्तों के चेहरों पर भी खुशियां झलक जाती है। सरल स्वभाव के धनी गुरूवर ने जैन समाज ही नहीं वरन सनातन धर्म में भी कई प्रतिष्ठाएं की। उनके इन कार्यों को देख आज भी उनकी प्रतिमा के दर्शनकर मांगे आशिर्वाद से भक्तों को अपनी मंजिल मिल जाती है। ऐसे चमत्कारी, परोपकारी महापुरूष परम गुरूदेव श्री कमलविजयजी महाराज के देवलोक गमन पश्चात भी वे अपने भक्तों के दिलों में बसे हुए है। 20 फरवरी 2019 को गुरूवर के जन्मोत्सव कार्यक्रम को लेकर तैयार पूर्ण कर ली गई। इस दिन गुरूवर के सैकडों भक्त बामणवाडजी पहुंचकर गुरूवर की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना करेंगे। इस दिन स्कुली बच्चों को सामग्री भी वितरित की जाएगी। गुरूवर कमल विजयजी म.सा. की याद में गुरूभक्तों द्वारा बामनवाडजी में कमल लोटस्ट टेम्पल की प्रतिष्ठा महोत्सव बड़े धूमधाम से सम्पन्न किया गया वहीं इसी परिसर में गुरूवर के नाम से कमल कॉलेज एण्ड एज्यूकेशन बामणवाडजी में संचालित है जहां कला संकाय व वाणिज्य संकाय कोर्स चलते है। जोधुपर में बोधी इन्टरनेशनल स्कुल भी गुरूदेव की प्रेरणा से संचालित है। बामनवाडजी में हरवर्ष गुरूदेव की प्रेरणा व आशीर्वाद से पशु चिकित्सा शिविर व आंखों के शिविर का आयोजन किया जाता है। गुरूदेव की याद में हर माह की 20 तारीख को पोधारोपण, स्कुल बच्चों को सामग्री वितरित जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। वर्तमान में गुरूवर की शिष्या रमाबेन (रोमी भंसाली) द्वारा मंदिर ट्रस्ट से जुडा सम्पूर्ण कार्य इनकी देख-रेख में हो रहा है।
कमल विजयजी महाराज के स्मृति मंदिर का ऐतिहासिक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न
सिरोही के बामणवाडज़ी तीर्थ की पूण्य भूमि पर तपस्वी मुनिराज कमल विजयजी महाराज के स्मृति मंदिर का ऐतिहासिक प्रतिष्ठा महोत्सव शुक्रवार 15 फरवरी को धूमधाम से सम्पन्न हुआ। इस प्रतिष्ठा समारोह में तपस्वी मुनिराज कमल विजयजी महाराज के भक्त देश-विदेश से बड़ी संख्या में पधारे।

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