सच की तलाश में बेफ्रिक चल पड़ा

डगर है मुश्किल राहे है कठिन, लेकिन चल पडा है एक ऐसा शख्स, समाज के हितों की रक्षा और न्याय के लिए। साईकिल पर सवार और आगे कुछ फाइलों की गठरी, तेज धूप हो या सर्दी अपने धून मेें सवार यह गुमनाम शख्स सरकारी नौकरी छोड अकेला ही एक मुहिम पर चल रहा है। यह मुहिम है सूचना का अधिकार। इस मुहिम को चलाने वाले इस गुमनाम शख्स का नाम है महेन्द्र सिंह गोयल, जो सिरोही के नया वास निवासी है। 2008 में ग्राम सेवक पद की नौकरी को छोड समाज की सेवा मेें निस्वार्थ योगदान देना शुरू किया। इन्होंने उन योजनाओं की सूचना सभी सरकारी विभागो से मांगनी शुरू की जो जनता लिए हितकारी थी, जो विभागीय फाइलों में दबी पडी थी। इन्होंने बडे-बडे अधिकारियों और विभागों से सूचना मांगकर कुछ हितकारी योजनाओं में सफलता पाई और किसी सूचना मेें अधिकारी पेशी पर जयपुर जाना कबूल करते है लेकिन सूचना का जवाब नहीं देते। अपनी कर्मठता के लिए जाने जाना वाला यह गुमनाम शख्स प्रत्येक माह अपनी पेंशन से 1000 रूपये कटवाकर जनहित में पूरे 33 जिलों से सूचना मांगते है। आजकल इंसान जहां अपने स्वार्थ और परिवार से अधिक कुछ नहीं सोचता, ऐसे में यह शख्स जनता को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकर सम्बधित विभाग से सूचना मांगकर न्याय की गुहार करता है। जिंदगी कई उतार-चढाव के बीच इन्होंने कभी अपने कर्म से हार नहीं मानी।
आरटीआई का सफर
आरटीआई के कार्यकत्र्ता महेन्द्रसिंह गोयल ने पहली आरटीआई जनवरी 2009 को पंचायत समिति सिरोही में दायर की थी, गौरतलब है कि महेन्द्रसिंह गोयल ने इसी विभाग से स्वेच्छिक सेवानिृवत्ति ली थी। क्योंकि यह विभागीय भ्रष्ट्राचार से परेशान थे और यह नहीं चाहते थे कि वे भी इस भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाए।
इनके द्वारा जिन-जिन आरटीआई की सूची विभागों से मांगी गई उनमें जनहित को जिस क्षेत्र मेें राहत मिली उनमें बीपीएल सूची, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन की सूची प्राप्त हुई। इसके अलावा नगर परिषद के वर्तमान 25 वार्ड पंचो के शपथ पत्र सूची उपखण्ड अधिकारी से प्राप्त हुई। एवं आयुर्वेदिक चिकित्सालय में महिलाओं के प्रसव समय पर मिलने वाले किट सम्बधित सूचना भी प्राप्त हुई।
राजस्थान सिविल सेवा प्राधिकरण द्वारा निर्णय जिनमें बांसवाडा एवं डूगंरपुर 143 अप्रशिक्षित शिक्षकों को चयनित वेतमान दिया गया उसकी भी सूचना निदेशक बीकानेर प्राथमिक एवं माध्यमिक द्वारा प्राप्त हुई।
पंचायतराज जयपुर से राज्य के 33 जिलों के ग्रामसेवकों की सूची प्राप्त हुई थी। क्योंकि ग्रामसेवकों की वरीयता सूची में असमानता होने के कारण आरटीआई मांगी गई थी।

इसके द्वारा सबसे ज्यादा सिरोही नगर परिषद से सूचना मांगी गई। वहीं इसके अधिकारी नोटिस का जवाब ना देकर सुनवाई पर जाना ज्यादा पसंद करते है। इनके द्वारा मांगी गई सूचना का आज दिन तक जवाब नहीं मिला।
2019 को भेजे गए नोटिस की सूचना
अपीलार्थी महेन्द्रसिंह गोयल की आरटीआई दायर करने के बाद द्वितीय अपील सुनवाई में नोटिस के रूप में जिन-जिन विभागों को कितने नोटिस 2019 को भेजे गए उनमें निम्नलिखित विभाग-आयुक्त नगर परिषद सिरोही, संख्या- 12, ग्राम विकास अधिकारी, भटाणा तहसील रेवदर, सिरोही, नोटिस की संख्या- 3, ग्राम विकास अधिकारी, दांतराई, जिला-सिरोही, नोटिस की संख्या-1, जिला रसद अधिकारी, सिरोही, नोटिस की संख्या -2, जिला साक्षरता अधिकारी, सिरोही, नोटिस की संख्या-1, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सिरोही, नोटिस की संख्या -1, ग्राम विकास अधिकारी, रेवदर, जिला-सिरोही, नोटिस की संख्या – 4, प्रधानाचार्य राज्य माध्यमिक विद्यालय मेज पुरोहितान गांव, बागोडा,जिला-जालौर, नोटिस की संख्या-1, जिला शिक्षा अधिकारी, जालौर, नोटिस की संख्या-1, सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग, जालौर, नोटिस की संख्या-1, सचिव वित्तीय (बुडगेट) विभाग, जयपुर, नोटिस की संख्या-1, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, उदयपुर, नोटिस की संख्या-1, उपखंड अधिकारी बांसवाडा, राजस्थान, नोटिस की संख्या-1, इन सभी नोटिसों की सुनवाई वर्ष 2019 में होनी है।

जनहित में आरटीआई मांगने पर हुए सम्मानित
बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय सिरोही में छात्राओं को छात्रवृत्ति भी नहीं मिल रही थी। इस सम्बन्ध मेंं तात्कालिक प्रिंसिपल से आरटीआई के द्वारा सूचना मांगी गई थी। इसका जवाब ना मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील ओर उसके बाद द्वितीय अपील सूचना आयोग को दी गई। इसके बाद आयोग द्वारा दो बार तात्कालिक प्रिंसिपल को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद ही बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल को छात्राओं को छात्रवृत्ति मिलनी शुरू हो गई। इस बाबत् वर्तमान प्रिंसिपल द्वारा महेन्द्रसिंह गोयल को 26 जनवरी 2019 को सम्मानित किया गया।
आरटीआई कार्यकत्र्ता महेन्द्रसिंह गोयल ने सामाजिक कार्य बिना किसी लोभ लालच के करते है। आज तक जितनी थी इन्होंने सूचना मांगी है वो अपने हाथों से लिखकर ही भेजतेे है, कभी भी कम्प्यूटर का सहारा नहीं लिया।
इनके द्वारा सभी आरटीआई से सूचना कॉरीयर के द्वारा ही मांगते है।

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