मिट्टी में मिला डामर, हाइवे पर आधे फीट के खड्ढे

  • बारिश ने खोल दी निर्माण की पोल, फिर भी वसूल रहे टोल
  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व टोल प्लाजा की अनियमितता उजागर

मिरर न्यूज। कमीशन के खेल में शहर-देहात तो क्या अब राष्ट्रीय राजमार्ग (हाइवे) की सडक़ें भी घटिया बनने लग गई है। इस बार सिरोही जिले से गुजरने वाले सभी हाइवे की सडक़ों की पोल खोल दी, जहां आधे आधे फीट गहरे खड्ढे पड़ गए हैं और डामर के नीचे गिट्टी की जगह मिट्टी निकल आई है। इस तरह टोल प्लाजा कंपनी के साथ मॉनिटरिंग करने वाली भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पाली की गंभीर अनियमितता भी खुलकर सामने आ गई। बीच सडक़ पर अंधे खड्ढो की वजह से हर वक्त वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा हैं और कई दुपहिया वाहन तो ओवरटेक के प्रयास में खड्ढो में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। इसकी शिकायत के बाद भी न तो टोल प्लाजा कंपनी द्वारा कोई ध्यान दिया जा रहा है और न ही हाइवे ऑथोरिटी व प्रशासन गंभीर है। इसका खमियाजा वाहन चालकों को दुर्घटनाग्रस्त होकर भुगतना पड़ रहा है।
सिरोही जिला मुख्यालय से ब्यावर एवं पाली से पिंडवाड़ा हाइवे की सडक़ बने अभी सिर्फ चार वर्ष ही पूर्ण हुए, मगर घटिया निर्माण के तहत सडक़ें तार-तार हो चुकी है। निर्माण में न तो सडक़ों की लेवलिंग का ख्याल रखा गया और न ही गुणवत्तापूर्ण सामग्री काम में ली गई। यही वजह है कि हाइवे पर जगह जगह बारिश में पानी भर रहा है, जिससे डामर उखड़ रहा है और नीचे से गिट्टी के साथ मिट्टी निकलकर सडक़ पर पसर रही है। इस कारण आए दिन वाहन चालक दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं, तो कई लोग अपनी जान भी गवां रहे है। फिर भी हाइवे ऑथोरिटी द्वारा क्षतिग्रस्त हुई हाइवे की सडक़ों की मरम्मत के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।
40 की स्पीड में चलना भी मुश्किल
हाइवे की सडक़ों व विशेष तौर से फोरलेन पर न्यूनतम गति सीमा 100 किमी. का दावे के उलट कार, जीप, ट्रक, बसें 40 की स्पीड में भी नहीं चल पा रहे हैं। जो भी वाहन चालीस से ज्यादा स्पीड में चलेगा, उसका खड्ढो में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त होना तय है। इस तरह अब हाइवे पर फोरलेन निर्माण का औचित्य ही नहीं रह गया है।
गांव से भी बदत्तर हालत
पाली-ब्यावर व पाली-पिंडवाड़ा हाइवे की हालत तो इन दिनों ग्रामीण क्षेत्र की तंग सडक़ों से भी ज्यादा खराब हो चुकी है। आज गांव की सडक़ों पर चलना सुरक्षित है, मगर हाइवे पर चलना जान जोखिम में डालने के समान हो गया है।
जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल
हाइवे सडक़ का डामर मिट्टी में मिलने की पोलपट्टी उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे अफसरों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई है कि आखिर उनके द्वारा लापरवाही ठेकेदार टोल प्लाजा कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
सिर्फ टोल वसूली का ख्याल
घटिया सडक़ बनाकर टोल कंपनी सिर्फ वाहन चालकों से टोल वसूली पर ध्यान दे रही है। लोगों के सुरक्षित सफर का कोई ख्याल नहीं है। यही नहीं, हाइवे पर जेब्रा लाइन, सडक़ की सीमा लाइन और संकेतक का भी अभाव है। विकट मोड़ तक के भी संकेतक नहीं है। इस कारण हाइवे पर दिनोंदिन हादसे बढ़ते जा रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
8 माह में ही उखड़ा डामर
सिरोही शहर की सडक़ों के निर्माण में भी ठेकेदार, सार्वजनिक निर्माण विभाग व नगरपरिषद के अफसर सिर्फ कमीशन कमाने में जुटे हुए हैं। सिरोही के कृष्णपुरी से अमर नगर तक जनवरी 2019 में बनी सडक़ का डामर सिर्फ 8 माह ही में उखडऩे लग गया। इस तरह ठेकेदार की गंभीर अनियमितता खुल कर सामने आ गई। इस पोलपट्टी में विभागीय मिलीभगत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अफसर-नेताओं को नहीं वास्ता
सिरोही शहर के साथ हाइवे की सडक़ों पर बड़े-बड़े खड्ढे पड़ गए हैं, जहां से आए दिन आला अधिकारी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व मंत्री भी गुजर रहे हैं। फिर भी न अधिकारियों को कोई फिक्र है और न ही जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई आवाज उठाई जा रही है। जब जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि ही मौन साधे हुए हैं, तो आमजन की समस्या का समाधान कैसे हो पाएगा।

सिरोही शहर के दरगाह रोड़ कृष्णापुरी से अमरनगर तक जनवरी 2019 में यह रोड़ बना था जो मात्र आठ महीनों में ही गड्ढों में तबदील हो गया। अब आप ही विचार कीजिए…

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