मासूम करन ने जीती जि़न्दगी की जंग

सिरोही के जावाल गांव निवासी 04 वर्षीय मासूम करन ने जन्मजात ह्रदय रोग को धता बताकर नई जि़न्दगी में प्रवेश किया है और ये राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की बदौलत संभव हो सका है। पिता नारायणलाल पेशे से किसान हैं और उनके पास करन के ईलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे, ऐसे में आरबीएसके के भगीरथ प्रयासों से उनके कलेजे के टुकड़े को नया जीवन मिला है और उनकी जि़न्दगी में कई वर्षों बाद खुशियों का आगमन हुआ है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि पिता नारायणलाल ने बालक करन के जन्म से ही उसकी जन्मजात ह्रदय रोग विकृति के ईलाज के लिए अस्पतालों के खूब चक्कर लगाए, लेकिन हर बार उनकी माली हालत आड़े आ गई। परिस्थितियोंवश वे कई बार हताश और मायूस हो जाया करते और अपने लाडले के ईलाज की असमर्थता के चलते स्वयं को कोसा करते। लेकिन एक दिन वो भी आया जब निराशा का कुंहासा छटा और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महत प्रयासों से नारायणलाल और उनके परिवार में खुशियों ने दस्तक दी। एक दिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल हैल्थ टीम जब जावाल आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए आई। परीक्षण के दौरान वहां बालक करन जन्मजात हृदय रोग की बीमारी के विषय मे पता लगने पर उसे जे.के. फोर्टिस अस्पताल, उदयपुर के लिए रैफर कर दिया। हॉस्पिटल में चिकित्सकों की टीम ने बालक करन की आवश्यक जाँचे कर ऑपरेशन किया। ऑपरेशन पूर्णत: सफल रहा और 15 दिन अस्पताल मे चिकित्सकों की निगरानी के रहने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में नन्हा करन पूर्णरूप से स्वस्थ है पिता नारायणलाल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं, जिसके नि:शुल्क ईलाज ने उनके पुत्र को नया जीवन दिया और गहन पीड़ा से निजात दिलाई। गौरतलब है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 0 से 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों का उपचार किया जाता है। आरबीएसके की मोबाइल हेल्थ टीम विभिन्न आंगनवाड़ी केन्द्रों, शिक्षा संस्थानों पर जाकर लगभग 38 बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के उपचार मे मदद करती है, मोबाइल हेल्थ टीम बच्चों की जांच कर उस अनुरूप की जाने वाली चिकित्सा हेतु बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या फिर मेडिकल कॉलेज रेफर करती है, वहां इन बच्चों का नि:शुल्क उपचार किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »