बत्तीसा नाला परियोजना की उम्मीदें, अब धरातल पर

बत्तीसा नाला परियोजना

मिरर न्यूज। पेयजल व सिंचाई के लिहाज से सिरोही जिले में बड़ी जल परियोजना की लंबे समय से मांग उठ रही थी, नर्मदा और माही नदी के पानी से प्यास बुझाने के ख्वाब दिखाकर नेता लम्बे समय से लोगों को भ्रमित कर वोट बटोर रहे थे, मगर अब जनता उनका रुख समझ गई, तो बत्तीसा नाला परियोजना को जमीन पर उतारने के प्रयास किए गए। 2016 से लंबित बत्तीसा नाला परियोजना का कार्य अब जमीन पर दिखने लगा हैं, जो न सिर्फ अधिकारी, बल्कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की रूचि का ही परिणाम है। इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि अब तक अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्तर पर ठोस प्रयास ही नहीं हुए और इसी वजह से यह परियोजना शुरू नहीं हो पाई। खैर, अब बत्तीसा नाला जल परियोजना का कार्य धरातल पर दिखाई देने लगा है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सिरोही जिले में लोगों की प्यास बुझाएगी और क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे सिरोही शहर के साथ ही तीन कस्बों व 35 गांवों में पानी का स्थायी समाधान होगा।
बत्तीसा नाला परियोजना देलदर


सिरोही जिले के पेयजल समस्या निदान एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराये जाने तहसील आबूरोड के ग्राम देलदर के समीप बत्तीसा नाला परियोजना निर्माणाधीान हैं। आबूरोड तहसील में भाखर क्षेत्र के प्रतिवर्ष व्यर्थ बहकर जाने वाले पानी को रोककर देलदर नीचलागढ़ मार्ग पर घाटी में बांध बनाकर रोका जाएगा। परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति 228 .05 करोड रुपए का बजट 28 जुलाई 2016 को ही राज्य सरकार द्वारा जारी कर दिए गए थे।
बत्तीसा नाला बांध में 170.16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल से वर्षा का जल संग्रहित होगा। बांध की भराव क्षमता 16.29 मिलियन घनमीटर है। जिसमें से 7.64 मिलियन घनमीटर पानी पिण्डवाडा तहसील के 35 गांव एवं सिरोही शहर सहित 3 कस्बों की लगभग 1.63 लाख जनसंख्या को पेयजल हेतु उपलब्ध होगा। पेयजल हेतु जलदाय विभाग द्वारा बांध निर्माण में अनुपातिक पानी की हिस्सा वहन की जायेगी। शेष पानी से ग्राम देलदर, भारजा, टुंका इत्यादि गांवों की 900 हैक्टयर क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराया जायेगा।
बत्तीसा नाला सिंचाई परियोजना के निर्माण में डूब क्षेत्र, डेम लाईन एवं सडक़ में ग्राम देलदर, जायदरा, निचलागढ़ तथा क्यारी ग्राम की कुल 158.02 हैक्ट. भूमि प्रभावित होती हैं जिसमें से 91.202 हैक्ट. भूमि वन विभाग के अधिपत्य की भूमि, शेष 64.80 हैक्ट. भूमि निजी खातेदारी, आबादी एवं 2.02 हैक्ट. सरकारी बिलानाम भूमि हैं। परियोजना से प्रभावित वन भूमि के प्रत्यावर्तन हेतु जल संसाधन विभाग द्वारा ऑन लाईन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया गया जिसे वन विभाग के फिल्ड अधिकारी से लेकर मुख्य वन संरक्षक तक प्रकरण की जांच एवं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अंतिम सैंद्वातिक स्वीकृति वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा दिनांक 09.04.2018 को जारी कर दी गई है। प्रकरण में वन मंत्रालय भारत सरकार की स्टेण्ंिडग कमेटी में विचार विमर्श कर स्वीकृति जारी की गई।
परियोजना से प्रभावित निजी भूमि की अवाप्ति हेतु भूमि अधिग्रहण, पुनरूद्वार, पुनर्वासन में उचित प्रतिकार तथा पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अन्तर्गत उपखण्ड अधिकारी एवं भूमि अवाप्ति अधिकारी माउण्ट आबू द्वारा अधिनियम की धारा-23 के अन्तर्गत 63.006 हैक्टयर भूमि के बदले भूमि व शेष 2.51 हैक्टयर अवाप्त भूमि तथा परिसम्पतियों की अवाप्ति हेतु एवार्ड दिनांक 11.12.2017 को राशि रूपये 237.38 लाख का मुआवजा हेतु एवार्ड जारी किया गया। भूमि अवाप्ति अधिकारी आबूपर्वत के माध्यम से एवार्ड राशि लाभान्वितों को जारी कर दी गई हैं। अधिनियम की अनुपालना में प्रभावित क्षेत्र की ग्राम पंचायत देलदर, जायदरा एवं निचलागढ़ द्वारा सामाजिक समाघात रिपोर्ट दिनांक 02.10.2016 को ग्राम सभा के माध्यम से जन सुनवाई कर अधिग्रहण प्रस्तावित किया गया तथा सामाजिक समाघात रिपोर्ट का स्वतंत्र बहु शाखीय विशेषज्ञ समूह के माध्यम से दिनांक 25.10.2016 को मूल्याकंन किया जाकर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की गई। अनुसूचित जन जाति क्षेत्र के व्यक्तियों को अर्जित क्षेत्र के समतुल्य या ढाई एकड भूमि, जो भी कम हो उपलब्ध करवाई गई है तथा ढाई एकड से अधिक भूमि का मुआवजा निर्धारित किया गया। अधिनिर्णय में अवाप्ति हेतु भूमि के बाजार दर को दो से गुणित कर बाजार मूल्य की गणना तथा भूमि के बाजार मूल्य के शत प्रतिशत के समतुल्य मूल्य दो से गुणित कर तोषण राशि की गणना की गई है। अवाप्ति में सामाजिक समाघात निर्धारण विज्ञप्ति जारी होने से एवार्ड तक की अवधि के लिए 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज गणना की जाकर तथा अवस्थित परिसम्पतियों के मुआवजे की गणना की वर्तमान बी.एस.आर. मूल्य पर गणना की गई।
परियोजना के डूब में आने से क्यारी एवं निचलागढ ग्राम के 292 परिवारों का पुनर्वासन एवं पुनव्र्यस्थापन हेतु भूमि अधिग्रहण, पुनरूद्वार, पुनर्वासन में उचित प्रतिकार तथा पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अन्तर्गत संभागीय आयुक्त, जोधपुर द्वारा राशि रूप्ये 2240.66 लाख का पैकेज अनुमोदन किया गया है।
प्रभावित परिवारों के पुनर्वासन हेतु इन्दिरा आवास के माप दण्ड के समतुल्य राशि, 1 वर्ष के लिए जीवन निर्वाह अनुदान, परिवहन खर्च, पुनर्वासन भत्ता, पशुवाडा सुविधा हेतु प्रति परिवार 3.60 लाख का परिलाभ दिया गया है। पुर्नवासन स्थल भीमाणा में स्थापित परिवारों के निवास हेतु प्रति परिवार 12 मीटर*18 मीटर, सामुदायिक भवन पेयजल व्यवस्था, विद्युतीकरण सुविधा, विद्यालय भवन,सडक़ का निर्माण, मन्दिर/चौपाल/चबूतरा, पशु चिकित्सालय, चिकित्सा उप केन्द्र, आंगनवाड़ी, खेल मैदान, दुकानें इत्यादि सुविधाएं विकसित की जा रही है।
बांध निर्माण से देलदर से निचलागढ सम्पर्क सडक डूब क्षेत्र में आयेगी जिससे भाखर क्षेत्र के गांवों का आवागमन प्रभावित होगा। अत: इस सडक के वैकल्पिक सडक हनुमान टेकरी से निचलागढ तक निर्माण का कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से प्रगतिरत है। इस सडक के निर्माण से भाखर ़क्षेत्र के लोगो का आबूरोड से सीधा सम्पर्क स्थापित होगा जिससे क्षेत्र के सभी लोगो को सुविधा होगी।
बांध के निर्माण हेतु एकल ई.पी.सी. आधारित निविदा पर मैसर्स एस.एम.एस. लिमिटेड नागपुर को राशि रूपये 133.435 करोड़ का कार्यादेश दिया गया हैं, इस कार्य को पूर्ण करने की तिथि 15.10.21 निर्धारित है। आवंटित कार्य के तहत फर्म द्वारा 340 मीटर लम्बाई तथा 52 मीटर अधिकतम उंचाई में कंक्रीट का ओवरफ्लो मय नॉन ओवरफ्लो का निर्माण रिवर ट्रेनिंग वर्क, अप्रोच सडकए एप्रन निर्माण के कार्य किये जाने है। वर्तमान में बांध निर्माण कार्य प्रगतिरत है। निर्माण कार्य सडक के विस्थापन के अभाव में धीमी गति से प्रगतिरत है परन्तु वैकल्पिक सडक से आवागमन बहाल होते ही कार्य तीव्रगति से प्रारम्भ होगा।

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