प्रतिबंध के बाद भी खुलेआम प्लास्टिक का उपयोग

-माउंट आबू में 15 अगस्त से प्लास्टिक उपयोग वर्जित, लेकिन नहीं बदले हालात
-बोर्ड, बैनर के स्लोगन तक सीमीत है प्रशासन के प्रयास
-सिरोही मिरर किया निरीक्षण तो सामने आ गया झूठ का सच

माउंट आबू विशेष:-

मिरर न्यूज। प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग पहले से प्रतिबंधित है और अब जिला प्रशासन ने 15 अगस्त से माउंट आबू में प्लास्टिक पॉलीथिन, पानी की बोतल, गुटखा, नमकीन, कुरकुरे, तेल पाउच के उपयोग पर रोक लगा दी। इसके बाद भी माउंट आबू में प्लास्टिक का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह है प्रशासन, नगरपालिका, वन महकमे की कार्रवाई भी सिर्फ बोर्ड, बैनर-पोस्टर पर लिखे स्लोगन तक ही सीमित होकर रह गई है। बाजार में चाय थड़ी, सब्जी विके्रता से लेकर होटल, रेस्टोरेंट, किराणा व कपड़े की दुकानों पर भी प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग सामान्य तौर पर किया जा रहा है। इससे न सिर्फ प्रशासन के प्लास्टिक उपयोग पर रोक के आदेश धरे रह गए, बल्कि सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कानून की भी धज्जियां उड़ रही है। इस तरह नियम-कायदे माउंट आबू में सिर्फ मखौल बनकर रह गए हैं, जहां न तो आम लोगों को कानून कायदे की परवाह है और न ही पालना कराने वाले जिम्मेदार विभागों को कोई मतलब है। सिरोही मिरर रिपोर्टर ने माउंट आबू बाजार व आस पास क्षेत्र का निरीक्षण किया, तो प्लास्टिक प्रतिबंध का प्रशासन का झूठ खुलकर सामने आ गया।
जानकारी के अनुसार पर्यावरण प्रदूषण को रोकने व वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त बैठक में माउंट आबू में 15 अगस्त से प्लास्टिक के उपयोग पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। इसके तहत माउंट आबू उपखंड अधिकारी डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने बताया कि पेड़, पौधों और जानवरों के हितों को ध्यान में रखते हुए माउंट आबू को प्लास्टिक मुक्त करने का निर्णय लिया है। प्लास्टिक पारितंत्र (इकोलॉजी) को नुकसान पहुंचा रहा है। इसके तहत अब प्लास्टिक कैरी बैग, बॉक्स, पाउच (तरल पदार्थों के लिए), थर्माकोल कप, थर्माकोल की प्लेट्स, डिस्पोजल प्लास्टिक के साथ बंद पानी की बोतलों के उपयोग पर भी रोक लगा दी। कम खर्चे में सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए नगरपालिका माउंट आबू को खास निर्देश दिए गए कि स्वचालित पीने के पानी की मशीन स्थापित करें। फिर भी न तो मशीनें लगी और न ही प्लास्टिक बोतलें बंद हो पाई है।
कचरे में प्लास्टिक का ढेर
माउंट आबू में जगह जगह लगे कचरा पात्र में सर्वाधिक कचरा प्लास्टिक पॉलीथिन का ही दिखाई दिया। पीने के पानी की बोतलें भी चौतरफा पड़ी मिली। किराणा व जनरल स्टोर पर पाउच बंद खाद्य व पेय पदार्थों की लडिय़ां खुलेआम लटकते मिली। इस तरह प्लास्टिक के उपयोग पर रोक के दावे झूठे निकले।
बैनर-पोस्टर लगाए, पालना कोई नहीं करता
उपखंड अधिकारी ने सिरोही मिरर से बातचीत में बताया कि माउंट आबू में प्लास्टिक पर पूर्णतया प्रतिबंध है। इसके लिए प्रशासन व नगरपालिका के जगह जगह बैनर, पोस्टर व बोर्ड लगे हुए हैं, मगर कोई व्यक्ति उसकी पालना नहीं कर रहा है और न ही जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई कार्रवाई की जा रही है।
सिरोही मिरर ने पहले ही चेताया
जनवरी 2015 के अंक में ही सिरोही मिरर ने ‘यह खबर नहीं अलार्म है, कैसे बचेगा माउंट आबू…’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इको सिंसेटिव क्षेत्र के हालात उजागर किए थे। तब नगरपालिका टोल गेट के सामने अंकित ‘इको सेंसटिव जोन पॉलीथिन/ प्लास्टिक उपयोग, उपभोग निषेध क्षेत्र, उल्लंघनकर्ता के विरुद्ध दंडनीय कार्यवाही की जाएगी…’ का बोर्ड भी हट गया। इससे नगर निकाय के साथ प्रशासन की पोलपट्टी भी खुलकर सामने आ गई।
अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस
प्लास्टिक पॉलीथिन व बैग के उपयोग को रोकने के लिए आमजन में जनजागरुकता के लिए प्रतिवर्ष 7 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस मनाया जाता है, मगर प्रशासन के जागरुकता के प्रयास भी सिर्फ उन दिवस तक ही सीमित होकर रह गए हैं। अब तक न तो आम लोग प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के लिए सतर्क हो पाए हैं और न ही स्थानीय प्रशासन, विभाग और सरकार के नुमाइंदे गंभीर है। जागरुकता कार्यक्रम के तहत प्लास्टिक के उपयोग से पर्यावरण में फैलते प्रदूषण व भविष्य के लिए घातक परिणामों से अवगत कराना है, मगर इस तरह के कोई ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं।
यहां प्लास्टिक प्रदूषण सर्वाधिक
इंडोनेशिया एक द्वीपसमूह है, जहां की जनसंख्या 260 मिलियन है। चीन में सबसे ज्यादा प्लास्टिक का प्रदूषण है और उसके बाद दूसरा देश इंडोनेशिया है, जहां पर हर साल 3.2 मिलियन टन प्लास्टिक का कचरा उत्पन्न होता है और जिसका निपटारा करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। जनरल साइंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार इसमें से 1.29 मिलियन टन कचरा समुद्र में जाता है।

माउंट आबू में अर्बुदा रेस्टोरेंट के सामने पड़ी कचरे पात्र के पास पड़े प्लास्टिक व पॉलीथिन।
जनवरी 2015 के अंक में प्रकाशित की थी यह खबर।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »