नामचीन निजी स्कूलों में फीस निर्धारण समिति की पालना की उड़ रही है धज्जियां

शिक्षा विभाग के अधिकारीयों द्वारा निजी स्कूलों में फीस निर्धारण समिति की जांच करने तक का समय नहीं, बताते है मिटिंगों का बहाना

अभिभावक ना दे मनमर्जी की फीस, करे शिकायत।

जिला प्रशासन भी मौन

शिक्षा अधिकारियों के गैरजिम्मेदारना रवैया के विरूद्ध होनी चाहिए कार्रवाही।

सिरोही जिला मुख्यालय की नामचीन श्री रूपरजत इंटरनेशनल स्कूल में फीस निर्धारण समिति का गठन बडे ही अजीबों गरीब तरीके से हुआ है जिसमें एक अभिभावक जिनकी संतान तो बाहर पड़ती है लेकिन उन्हें भी फीस निर्धारण समिति में जोडा गया है जो कि नियम विरूद्ध है जब ऐसी नामचीन स्कूलों द्वारा नियमों की पालना नहीं होगी तो अन्य निजी स्कूलों से क्या अपेक्षा की जा सकती है। उस पर शिक्षा विभाग की जिला शिक्षा अधिकारी गंगा क लावंत को इस मामले की जानकारी दी तो उन्होंने बताया कि कमेटी तीन साल चलती है जबकि फीस निर्धारण समिति में प्रतिवर्ष फीस निर्धारण समिति का गठन करना होता है इसकी जानकारी भी जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक को नहीं है तो इन निजी स्कूलों पर कार्रवाही होना कितना संभव हो सकता है।

सिरोही मिरर। इन दिनों जिले में निजी स्कूलों द्वारा एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से मनमर्जी की फीस वसूल की जा रही है और अभिभावक भी विवश होकर निजी स्कूलों को मुंह माँगी फीस दे रहे है क्योकि शिक्षा विभाग की बेरूखी के कारण अभिभावक करे भी तो क्या। इस पूरी धांधली को शिक्षा विभाग देखते हुए भी कार्रवाही करने में असमर्थ है। इस पूरे मामले को सिरोही मिरर ने निष्पक्षता के साथ उठाया ताकि अभिभावकों को अपने बच्चों के एडमिशन में मुंह माँगी फीस ना देनी पडे। सिरोही मिरर की खबर से शिक्षा विभाग की नींद तो खुली लेकिन निजी स्कूलों को कागजी कार्रवाही पूरी करने के आदेश देने तक ही सीमित रही। निजी स्कूलों ने भी बड़ी ही चतुराई से फीस निर्धारण समिति तो बना डाली लेकिन नियमों की पालना किए बिना। कुछ स्कूलों में तो ऐसे अभिभावकों को समिति में जोडा गया जिनके बच्चो उस स्कूल में पड़ते ही नहीं है। इन स्कूलों ने शिक्षा विभाग के कहने पर दस्तावेज तो जमा करा दिए लेकिन आराम परस्त शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास इतना समय नहीं की इन दस्तावेजों की जांच कर गलत दस्तावेज देने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाही कर सके।
अब तक किसी भी स्कूल पर कार्रवाही नहीं हुई सिर्फ राज्य सरकार द्वारा राजस्थान विद्यालय(फीस का विनिमय) अधिनियम 2016 के तहत माता-पिता अध्यापक संगम, विद्यालय स्तरीय फीस समिति व फीस का निर्धारण कर नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर स्थानीय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करने के आदेश दिए।
जिसके चलते कई निजी स्कूलों ने सिरोही मिरर की खबर के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग के निजी स्कूलों को आदेश देने के बाद तबाडतोड अपने विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर फीस की डिटेल तो चस्पा कर दी लेकिन इस फीस को तय करने वाली विद्यालय स्तरीय फीस समिति की कोई जानकारी चस्पा नहीं की जिससे निजी स्कूलों की तय की गई फीस पर भी सदेंह हो रहा है। उधर शिक्षा विभाग भी इन्हीं निजी स्कूलों की पैरवी करते हुए यह कह रहा है कि कुछ निजी स्कूलों ने डॉक्यूमेंट जमा करवाए है लेकिन सिरोही मिरर के डॉक्यूमेंट के बारे में पूछने पर कोई खास जवाब नहीं दे पाए। कहने को शिक्षा विभाग आम जन के लिए कार्य करता है लेकिन निजी स्कूलों की फीस धांधली में शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों पर कार्रवाही नहीं करने से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि कहीं न कहीं इन निजी स्कूलों को स्थानीय शिक्षा विभाग का समर्थन प्राप्त है।
फीस निर्धारण समिति के गठन में श्री रूपरजत इंटनेशनल स्कूल, सिरोही की धांधली उजागर
सिरोही जिला मुख्यालय पर स्थित श्री रूपरजत इंटरनेशनल स्कूल से जब सिरोही मिरर के रिपोर्टर द्वारा फीस निर्धारण समिति व फीस की जानकारी मांगी गई तो स्कूल प्रिंसिपल द्वारा बताया गया कि समस्त जानकारी नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी गई है उस पर नोटिस बोर्ड चस्पा फीस निर्धारण समिति के आठ सदस्यों की सूची लगी हुई थी जबकि फीस निर्धारण समिति में कुल दस सदस्य होते है। स्कूल द्वारा चस्पा की गई सूची में यह भी मालूम नहीं कि अभिभावक कौन है और अध्यापक कौन है। इसके अलावा फीस निर्धारण समिति में पहले सदस्य का अभिभावक के रूप में नाम दर्ज है लेकिन इनकी संतान इस स्कूल में पढ़ती ही नहीं है। फिर भी स्कूल प्रशासन ने ऐसे अभिभावकों के नाम जोडे जिनके बच्चे पढ़ते ही नहीं। स्कूल प्रशासन अपनी निजी फायदे के लिए फीस निर्धारण समिति में गोलमाल करते हुए यह सूची स्कूल प्रशासन द्वारा शिक्षा विभाग को भी दी गई लेकिन आराम परस्त शिक्षा विभाग के अधिकारियों के पास इतना भी समय नहीं की वे इन फीस निर्धारण समितियों की जाँच कर सके। सिरोही मिरर के रिपोर्टर द्वारा शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी को पूछने पर की कार्रवाही क्या की गई तो हमेशा का रटा-रटाया जवाब की मिटिंग है, बाल सभा है या फिर अन्य कार्यों का हवाला देते हुए मामले को बाद में कार्रवाही करने की बात करते है।
कई निजी स्कूलों में नहीं है नियमानुसार फीस निर्धारण समिति, मनमर्जी से तय हो रही है फीस
जिले के कई निजी स्कूलों में नियमानुसार फीस निर्धारण समिति का निर्माण नहीं हो पाया। कई निजी स्कूलें फर्जी तरीके से फीस निर्धारण समिति का निर्माण कर मनमर्जी से फीस तय कर अभिभावकों को लूट रहे है।
राजस्थान विद्यालय(फीस का विनिमय) अधिनियम 2016 के अध्याय 2 के अनुसार प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के आरंभ से 30 दिवस के भीतर-भीतर विद्यालय के मुखिया द्वारा माता-पिता अध्यापक संगम गठित किया जावेगा। विद्यालय के प्रत्येक अध्यापक और प्रत्येक छात्र के माता-पिता, माता-पिता अध्यापक संगम का सदस्य होगा और ऐसे संगम के प्रत्येक सदस्य से नगरीय क्षेत्र की दशा में पचास रू व ग्रामीण क्षेत्र की दशा में बीस रू वार्षिक रकम संगृहीत की जावेगी। उसके पश्चात् माता-पिता अध्यापक संगम का गठन हो जाने पर, विद्यालय स्तरीय फीस समिति गठित करने के लिए इच्छुक माता-पिता की लॉटरी, उनका लाट निकालकर आयोजित की जायेगी और ऐसी लॉटरी के एक सप्ताह पूर्व माता-पिता अध्यापक संगम के सदस्यों को नोटिस दिया जायेगा। विद्यालय स्तरीय फीस समिति के सदस्यों की सूची, विद्यालय स्तरीय फीस समिति के गठन से 15 दिवस की कालावधि के भीतर-भीतर नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित की जावेगी और उसकी प्रति तत्काल संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी जायेगी। विद्यालय स्तरीय फीस समिति की अवधि एक वर्ष की होगी।
अब आमजन का नहीं रहा शिक्षा विभाग
सरकार ने शिक्षा विभाग को आमजन के लिए बनाया है ताकि हर व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार मिल सके लेकिन सिरोही जिले के स्थानीय शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली कुछ ऐसी नजर आ रही है कि उनके लिए आमजन की सेवा से ज्यादा निजी स्कूलों की सेवा ज्यादा हितकारी लग रही है तभी स्थानीय शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों पर सिरोही मिरर द्वारा प्रकाशित खबर के बाद कार्रवाही तो हुई लेकिन कागजी। सभी निजी स्कूलों को स्थानीय शिक्षा विभाग ने आदेश दिए कि विद्यालय स्तरीय फीस समिति गठित कर फीस की डिटेल शिक्षा विभाग में जमा करवाने के लिए निर्देश दिए और निजी स्कूलों ने भी विद्यालय स्तरीय फीस समिति की जानकारी दिए बिना ही फीस की डिटेल नोटिस बोर्ड पर चस्पा की और शिक्षा विभाग को भी भेजी। लेकिन शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों में जाकर यह जानना मुनासिब नहीं समझा कि क्या वाकई में निजी स्कूलों में विद्यालय स्तरीय फीस समिति का गठन सही तरीके से हुआ है। राजस्थान विद्यालय(फीस का विनिमय) अधिनियम 2016 की निजी स्कूलों द्वारा क्या पालना की जा रही है। इस पर शिक्षा विभाग ने आमजन की भलाई छोड़ निजी स्कूलों को काफी राहत दी है। सरकार कानून तो बना देती है लेकिन उसे लागू करने में स्थानीय विभाग और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण यह कानून कागजों में ही सिमट के रह चुके है।


श्री रूपरजत इंटनेशनल स्कूल, सिरोही की फीस निर्धारण समिति के आठ सदस्यों की सूची

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