नदी-नालों की बहाली के अदालती आदेशों पर भारी प्रशासन की मनमानी -

नदी-नालों की बहाली के अदालती आदेशों पर भारी प्रशासन की मनमानी

  • हाईकोर्ट के अब्दुल रहमान फैसले के बाद एनजीटी के आदेश भी रह गए धरे
  • एनजीटी के आदेश पर कलक्टर ने जारी किए औपचारिक निर्देश, कार्रवाई नहीं

मिरर न्यूज। नदी, नाले, बांध, तालाबों से अतिक्रमण हटाकर 15 अगस्त 1947 की स्थिति बहाल करने के राजस्थान हाईकोर्ट के अब्दुल रहमान मामले में हुए आदेश अब सिर्फ प्रशासन की फाइलों में दबकर रह गए हैं। इस तरह अदालती आदेश सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सीमित होकर रह गए हैं। इसी तरह एनजीटी ओए 606 / 2018 के आदेश पर 17 जुलाई 2019 को जिला कलक्टर सिरोही ने बैठक लेकर पालना के औपचारिक निर्देश जारी कर दिए और आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। सिरोही के कालका तालाब (आखेलाव), मानसरोवर व लाखेलाव में प्राकृतिक नालों में होटलों की गंदगी, टांकरिया कोलोनी की गन्दगी जो कि नालिओं के माध्यम से प्राकृतिक नालों में जा रही है जिसे रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। यही स्थिति माउंट आबू, पिंडवाड़ा, शिवगंज, आबू रोड के साथ जिलेभर के गावों के तालाबों, बांध व नदी-नालों की बनी हुई है। इसको लेकर पूरे प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।
यह है हाईकोर्ट के आदेश
अब्दुल रहमान की जनहित याचिका में हाईकोर्ट द्वारा 2 अगस्त 2004 में दिए आदेश के मुताबिक समस्त जलस्त्रोतों में पानी की आवक में रोड़े बने अतिक्रमणों को हटाने, गन्दगी साफ कर 15 अगस्त 1947 की स्थिति बहाल करने के आदेश दिए, लेकिन इसकी पालना को लेकर न तो प्रदेश की राज्य सरकार गंभीर है और न ही जिला कलक्टर, उपखंड अधिकारी व तहसीलदारों के साथ नगरीय निकाय के अधिकारी गंभीर है। इसी क्रम में हाईकोर्ट ने 23 अगस्त 2011 को आदेश जारी कर अब्दुल रहमान प्रकरण में अब तक सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी चाही थी। तभी से इस पर हाईकोर्ट निरंतर निगरानी रखे हुए है। ताजा सुनवाई हाईकोर्ट 31 जनवरी 2019 थी और 21 फरवरी को इस पर फिर सुनवाई कर मुख्य सचिव को तलब किया है। सरकार के स्तर पर अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार की याचिका में वर्ष 2008 में दिए गए अंतिम आदेश व इस याचिका को बंद किए जाने के बाद यह मान लिया था कि अब कुछ नहीं होगा। यही वजह रही कि राजस्व मंडल में इस बाबत दायर हुए हजारों रेफरेंस में भी सुनवाई में ढील दे दी गई।
अब दोबारा हरकत में आई सरकार
हाईकोर्ट ने सुओमोटो बनाम राज्य सरकार याचिका की सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी चाही है कि अब्दुल रहमान में 2 अगस्त 2004 को पारित आदेश की अनुपालना में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। राजस्व मंडल समेत तमाम विभागों के पास पुरानी कार्रवाई के अलावा नया बताने को कुछ भी नहीं है।
अब हर महीने देनी होगी रिपोर्ट
सरकार किसी तरह इस मामले में अपना पक्ष मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। हाईकोर्ट को यह बताना है कि सरकार जल स्रोतों के कैचमेंट एरिया में किए जाने वाले अतिक्रमण हटाने को लेकर सजग है। यही वजह है कि राजस्व विभाग ने अब कलेक्टरों को आदेश दिया है कि अब्दुल रहमान प्रकरण के आदेश की पालना में सभी अपने जिलों में नदी, तालाब, नालों व अन्य जलागम क्षेत्रों के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण व निर्माणों के बार में मासिक रिपोर्ट तैयार करेंगे। कलेक्टरों से प्राप्त जानकारियों की मानीटरिंग होगी और लंबित प्रकरणों को दर्जकर राजस्व मंडल के समक्ष रेफरेंस दायर किए जाएंगे।
एनजीटी के आदेश पर कलक्टर ने ली बैठक
एनजीटी ओए 606 /2018 के मामले में जिला कलक्टर सिरोही की अध्यक्षता में 17 जुलाई 2019 को विशेष बैठक हुई। बैठक में सभी नगर निकायों को कचरा प्रबंधन के लिए यार्ड बनाकर व्यवस्थित निस्तारण करने के आदेश दिए। इसके तहत 18 बिन्दूओं की पालना के लिए निर्देश दिए, जिसमें डोर टू डोर कचरा संग्रहण, सुखे-गीले कचरे को अलग अलग संग्रहित करना, बाजार व दुकानों के बाहर कचरा संग्रहण की विकेन्द्रीकृत व्यवस्था, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट, प्लास्टिक प्रतिबंध की पूर्ण पालना हो, होटलों द्वारा दूषित पदार्थों को नदी नालों में फेंकने की कार्रवाही पर पूर्ण रोक लगाई जायें। केमिकल पदार्थ नदी, नालों को दूषित न करें, जन शिकायत के लिए व्यवस्थित रजिस्टर संधारित करें, एप्स जारी करें, ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए। कलक्टर ने उपखंड अधिकारी सिरोही, शिवगंज, पिंडवाड़ा, आबू पर्वत, रेवदर, नगरपरिषद सिरोही, नगरपालिका शिवगंज, पिण्डवाड़ा, आबू पर्वत, आबू रोड के आयुक्त के साथ समस्त पंचायत समितियों के विकास अधिकारी, तहसीलदारों, जल संसाधन विभाग के अभियंता, कृषि उप निदेशक, जिला उद्योग केंद्र महाप्रबंधक व चिकित्सा विभाग को पाबंद किया गया। इसके बावजूद आज तक धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस तरह हाईकोर्ट व एनजीटी के आदेशों की पालना की कार्रवाई सिर्फ बैठक और कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित होकर रह गए हैं।
सिरोही मिरर ने भी कई
बार प्रशासन को प्राकृतिक नालों, तालाबों में जा रही गंदगी के बारे में कुम्भकर्णी नींद से जगाने के लिए खबरें प्रकाशित कर किए है प्रयास…

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