धर्म की आड़ में पांच बीघा वन भूमि पर कब्जा, बना दी करोड़ों की बहुमंजिला इमारत


ब्रह्माकुमारी संस्था का  कारनामा उजागर, प्रशासन अतिक्रमण तोड़े उससे पहले हाईकोर्ट ने लगाई रोक


वन्यजीवों के आश्रय स्थल उजाडऩे का वन विभाग ने माना दोषी 

सिरोही मिरर न्यूज़। आमजन को धर्म, अध्यात्म की सीख देने वाली सफेद लिबास की ब्रह्माकुमारीज संस्था ने माउंट आबू तलहटी में धर्म की आड़ में वन अभ्यारण्य की पांच बीघा जमीन पर कब्जा कर करोड़ों की बहुमंजिला इमारत बना डाली। वन विभाग की जांच में अतिक्रमण पाए जाने पर नोटिस जारी कर जवाब दिए, मगर संस्था के अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा कोई पक्ष नहीं रखा गया। इसके साथ ही सफेदपोश ब्रह्माकुमारीज का  कारनामा उजागर हो गया। न्यायालय उप वन संरक्षक (वन्यजीव) माउंट आबू, सिरोही ने आदेश जारी कर पांच बीघा वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के आदेश दिए हैं। अवैध कब्जा ध्वस्त करने में खर्च राशि का व्यय भी संस्था से ही वसूल किया जाएगा। विधानसभा चुनाव की व्यस्तता के चलते सिरोही जिला कलक्टर ने 15 दिसम्बर के बाद माउंट आबू से ब्रह्माकुमारीज का अवैध भवन ढहाने के आदेश जारी किए हैं। 
जानकारी के अनुसार सिरोही कलक्टर द्वारा 13 सितम्बर 2017 को जारी आदेश पर वन व राजस्व महकमे की संयुक्त टीम द्वारा मौका निरीक्षण करने पर माउन्ट आबू वन्य जीव अभ्यारण्य की वन भूमि के आरक्षित वन खंड  नं. 1 के ग्राम आबू नं. 2 में चार बीघा दस बिस्वा जमीन पर अतिक्रमण कर ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा बहुमंजिला भवन निर्माण कर दिया। अवैध खनन कर चट्टानों को तोड़ कर गुफाएं बना डाली। सड़क निकाल कर दीवारों का निर्माण कर दिया, श्रमिक क्वाटर्स बनाए, कंटीले तारों से फैसिंग करके वन्यजीवों के आश्रय स्थल को उजाड़ दिया। इसके साथ ही सफेद लिबास में धर्म, अध्यात्म का पाठ पढ़ाने वाली प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था के काले कारनामे की भी पोल खुल गई। जिस पर ब्रह्माकुमारीज संस्था ने 4 दिसम्बर को जोधपुर हाइकोर्ट में स्टे के लिए आवेदन कर दिया था उस पर हाइकोर्ट से स्टे मिल गया और 4 जनवरी तक ब्रह्माकुमारीज द्वारा 5 बीधा पर अतिक्रमण कर बहुमंजिला भवनों को तोडऩे की कार्यवाही पर हाइकोर्ट ने रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट, हाइकोर्ट के आदेश दरकिनार
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 6 नवम्बर 2017 को प्रकरण 3855/2007 में दिए आदेश को भी ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा दरकिनार कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत वन भूमि पर कब्जा कर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के नियमों की भी धज्जियां उड़ा दी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने मामले में ब्रह्माकुमारी के अधिकृत प्रतिनिधि को सुनवाई का मौका देते हुए प्रकरण निस्तारण के आदेश दिए। फिर भी आरोपी पक्ष की ओर से कोई पेश नहीं हुआ और पक्ष नहीं रखा। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसम्बर 1996 व 4 अगस्त 2007 के आदेशों का भी उल्लंघन है। 
स्थगन आदेश खारिज 
आबू में वन भूमि पर कब्जा करने के बाद वन विभाग की कार्रवाई पर स्थगन के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा सिविल न्यायाधीश आबू रोड में दीवानी विविध प्रार्थना पत्र संख्या 41/2017 प्रस्तुत कर तत्काल अस्थायी निषेधाज्ञा (स्थगन) चाही गई। इस पर न्यायालय द्वारा 10 नवम्बर 2017 को अर्जी खारिज कर दी गई। इसके अलावा संस्था के चीफ इंजीनियर बी.के. भरत ने वन विभाग व तहसीलदार के विरुद्ध एसडीएम कोर्ट आबू पर्वत व एसीजेएम कोर्ट में भी प्रार्थना पत्र पेश कर अस्थायी निषेधाज्ञा चाही गई थी। प्रजापति ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा वन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई स्थगन के लिए हाईकोर्ट में परिवाद पेश किया। इस पर न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी सुनवाई कर 29 नवम्बर 2017 को परिवाद को खारिज कर आदेश दिए कि संस्था के अधिकृत प्रतिनिधियों को सुनवाई का मौका देते हुए वन विभाग आवश्यक कार्रवाई करें। 
संस्था ने स्वीकारा अतिक्रमण 
न्यायालय सहायक कलक्टर एवंं उपखंड अधिकारी आबू पर्वत को दिए प्रार्थना पत्र में 24/2017 के बिन्दु संख्या 7 व 8 में यह स्वीकार किया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान ने मनमोहिनी वन कॉम्प्लेक्स को पश्चिमी दिशा में शिफ्ट करना है। यह माउन्ट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य की वन भूमि के आरक्षित वन खंड नं. 1 के ग्राम आबू  नं. 2 की वन भूमि है। इस प्रकार अतिक्रमण करना (अप्रत्यक्ष तौर से) स्वीकार भी किया। 
नोटिस दिए, पेश नहीं हुए 
वन विभाग द्वारा ब्रह्माकुमारी संस्थान के कार्यकर्ता पांडव भवन आबू पर्वत निवासी शशिकांत पुत्र गंगाराम व्हटकर, ब्रह्माकुमारी सेकेट्ररी जनरल, डब्लूआरएसटी मैनेजिंग ट्रस्टी शांतिवन आबूरोड, संस्था के मैनेजर आबू रोड को नोटिस जारी किए गए। फिर भी कोई भी उपस्थित नहीं हुए। सभी को पांच से आठ बार नोटिस जारी किए। फिर भी न तो खुद के द्वारा भवन नहीं हटाया। इस पर न्यायालय उपवन संरक्षक (वन्यजीव) आबू पर्वत सिरोही ने आदेश दिया कि वन भूमि चार बीघा दस बिस्वा जमीन पर अतिक्रमण हटाने और जरूरत पडऩे पर जिला कलक्टर से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग करें। साथ ही अतिक्रमण हटाने पर समस्त व्यय राशि संस्था से ही वसूल की जावें। 4 दिसम्बर 2017 को समन जारी किया। फिर भी तीनों की तरफ से अधिवक्ता कुमारी लता अग्रवाल पेश हुई, मगर अतिक्रमण न होने संबंधित कोई दस्तावेज या साक्ष्य पेश नहीं कर पाए। 20 दिसंबर 2017 को अंतिम अवसर देते हुए फिर नोटिस दिया। फिर भी अधिवक्ता एनके गोयल व कुमारी लता अग्रवाल ही आए, मगर वन भूमि पर अतिक्रमण नहीं होने के साक्ष्य पेश नहीं कर पाए। 
पहले भी कब्जाई थी वनभूमि 
ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा माउंट आबू में पहले भी कई बार वन भूमि पर अतिक्रमण किए, जिसके प्रकरण वन विभाग में दर्ज है। न्यायालय सहायक वन संरक्षक सिरोही के आदेश 13 अक्टूबर 2009 के अनुसार 38 बीघा भूमि पर ब्रह्माकुमारी के व्यवस्थापक बी.के. भूपाल द्वारा अतिक्रमण करना पाया गया। जिसे हटाने के आदेश हुए थे। 19 मार्च 2017 को आनन्द सरोवर परिसर (पारिस्थितकीय संवेदनशील जोन) में अवैध खनन करते पाए जाने पर मशीन जब्त की और माफीनामा भरने पर 20 लाख रुपए का जुर्माना वसूल कर छोड़ा गया। वन क्षेत्र में अवैध कार्य करते हुए क्षेत्रीय वन अधिकारी आबू रोड द्वारा 16 अगस्त 2017 को जेसीबी मशीन को सीज किया गया, जिसे न्यायालय सहायक वन संरक्षक सिरोही द्वारा राजसात किया गया।

जानिए कौन क्या कहता है:-

इसमें कोर्ट ने भी आदेश दिए है डी. एफ. ओ. को, कि जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाया जाएं। अभी चुनावी समय होने के कारण इस पर 15 दिसम्बर के बाद कार्रवाही होगी।
अनुपमा जोरवाल, जिला कलक्टर, सिरोही

वन विभाग आबूपर्वत की 5 बीधा भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तथा वन विभाग के निर्णय के खिलाप ब्रह्माकुमारीज संस्था हाइकोर्ट में स्टे के लिए गई और बाद में स्टे को वापस ले लिया। वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है तो उस भूमि का डायवर्जन नहीं होता है।
बालाजी करी, उपवन संरक्षक, आबूपर्वत

हमने डावर्जन फाईल किया हुआ है तथा मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बावजूद कोई गैरकानूनी रुप से कार्यवाही करता है तो उसका स्वयं जिम्मेदार होगा। 
बीके कोमल, जनसम्पर्क अधिकारी, ब्रह्माकुमारीज, आबू रोड 

ब्रह्माकुमारीज संस्था, आबूरोड़ द्वारा किए गए अतिक्रमण का तो खुलासा हो गया और जिसके
 चलते बहुत जल्द ही इन बहुमंजिला इमारतों पर बुलडोजर की गाज गिरने वाली है। लेकिन 
क्या जीरावला पाश्र्वनाथ जैन तीर्थ द्वारा किए गए अतिक्रमण का खुलासा हो पाएगा क्योकि 
जिसमें एक तरफ जिला कलक्टर द्वारा गठित टीम की जांच द्वारा जीरावला पाश्र्वनाथ जैन तीर्थ 
द्वारा वन विभाग की लगभग 5 बीधा भूमि पर अतिक्रमण पाया गया और उसी जांच को एसीएफ 
कोर्ट वन विभाग ने अतिक्रमण मुक्त मानकर फैसला जीरावला पाश्र्वनाथ मदिंर ट्रस्ट के  हक में 
दे दिया तथा इस फैसले से असंतुष्ठ वन विभाग ने निष्पक्ष जांच हेतु जिला कलक्टर सिरोही को 
अपील  भी कर दी।  

क्या था जीरावला पाश्र्वनाथ जैन तीर्थ का मामला…

आस्था का केन्द्र कहलाए जाने वाले बहुचर्चित जीरावला पाश्र्वनाथ जैन तीर्थ द्वारा वन भूमि की परिधि में निर्माण होने की जानकारी के बाद भी वन विभाग के अधिकारी अंजान बने हुए थे। इस बात की भनक तात्कालीन जिला कलक्टर संदेश नायक को मिलने पर उन्होंने जांच के लिए वन विभाग कार्मिको व राजस्व अधिकारियों की टीम गठित की। टीम ने मौके पर मंदिर व वन विभाग की भूमि का सीमाज्ञान किया जिसमें लगभग 0.7 हेक्टेयर भूमि पर मंदिर का यांत्रिक भवन व अतिथि भवन का कुछ भाग तथा विशिष्ठ अतिथि भवन पूर्णतया वन क्षेत्र में होने का उल्लेख किया। वहीं जिस भाग को वन विभाग की भूमि पर बना उस जगह आरएफ अंकित किया गया। इस पंचनामेनुसार जीरावला जैन मंदिर द्वारा करीब 5 बीघा भूमि पर अतिक्रमण होना स्पष्ट हुआ। जिसके तहत वन विभाग ने अपने ही विभाग के एसीएफ न्यायालय में प्रकरण दर्ज करवाया। और उसी एसीएफ न्यायालय ने अतिक्रमी मंदिर ट्रस्ट को क्लीन चीट दे डाली। इस फैसले से असंतुष्ठ वन विभाग ने इस मामले की निष्पक्ष जांच हेतु जिला कलक्टर को अपील भी कर दी है। अब इस पूरे मामले में जिला कलक्टर की भूमिका अहम है।


सिरोही मिरर ने फरवरी 2018 के अंक में प्रकाशित की थी यह खबर

सिरोही मिरर ने जून 2018 के अंक में प्रकाशित की थी यह खबर

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