डिबेट का फन

जंगल नरेश अपनी राजसी गुफा के विशेष कक्ष में गद्देदार सोफे में हाथ भर धंसे हुए थे। सामने की मेज पर एक प्लेट में फ्राई ड्राई फु्रट और नक्काशीदार जाम में सोमरस लबालब भरा हुआ रखा था। ठीक सामने की दीवार पर एक बड़ी सी एलसीडी लगी हुई थी, जो कि वनराज के टाइम पास करने का साधन थी।
दिनभर आने वाले प्रोग्राम्स का अवलोकन करना ही उनका एकमात्र महत्वपूर्ण कार्य था। वैसा नहीं था कि उनके पास अन्य कोई कार्य न हो। कक्ष के कोने में लगे फाइलों का ढ़ेर उनके पंजे का चुंबन, चिह्न पाने को कब से तरस रहा है। कई फाइलें तो ऐसी भी थीं, जो दूसरों के भविष्य से संबद्ध थीं और एक ही चिह्न उनका सुखद भविष्य निरूपित करता, परन्तु श्रीमान जी जब दूरदर्शन से फुर्सत पाएं तब तो उन्हें दूसरे के भविष्य दर्शन होंगे।
उन्होंने एक दिन टीवी पर लाइव डिबेट देखा तो उनके मन में उत्सुकता ने सुगबुगाहट ली कि क्यों न ऐसी डिबेट हम भी अपने राज्य में करवाएं, तब तो लाइव नाम सार्थक होगा। उन्होंने तुरंत पास में पड़ी घंटी बजाई तो लंबी छलांग भरता प्यून बंदर आया और हाथ जोड़कर आज्ञा की प्रतिक्षा करने लगा। महाराज ने फरमाया- सूचना मंत्री को अंदर भेजो। जी महाराज! इतना कहकर बंदर बाहर निकल गया। इतने में बगल में एक फाइल दबाए सूचना मंत्री भालू आकर सलाम फरमाकर बगल के सोफे पर धंस गए। महाराज ने आदेशित स्वर में कहा- मंत्रीजी! मेरी इच्छा है कि महल में एक लाइव डिबेट का कार्यक्रम करवाया जाए। किसी चैनल से संपर्क कीजिए। मंत्री बोले- जैसी आपकी आज्ञा महाराज।
भालू ने बाहर निकल चैनल्स से संपर्क करना आरंभ किया। कुछ ने डिबेट का मुद्दा और उद्देश्य पूछा तो कुछ ने महाराज का नाम सुनकर चौंक गए और बहाना बना दिया कि समय नहीं है। तब उन्होंने दुनिया के सबसे तेज तथा विश्वसनीय खबरों का दावा करने वाले चैनल को फोन घुमाया।
मंत्री जी ने बताया कि महाराज का मन लाइव डिबेट देखने का है। क्या आप इसका इंतज़ाम कर सकते हैं? चैनल वालों ने कहा बिल्कुल कर देंगे, यह तो हमारे बांए हाथ का काम है। आपके महाराज हमारे स्टूडियो में आएंगे तो हमारा सौभाग्य होगा। इस पर मंत्री जी ने कहा- हमारे महाराज आएंगे नहीं, आपको आना पड़ेगा। चैनल ने कहा कि कोई बात नहीं, जैसा आपके महाराज का आदेश, हम आ जाएंगे। इसी बहाने जंगल की सैर हो जाएगी और जंगल वासियों से मुलाक़ात भी हो जाएगी। मंत्री जी ने कहा कि डिबेट का कोई ठोस मुद्दा है नहीं, पर महाराज की इच्छा सर्वोपरि है। चैनल का उत्तर विश्वास से लबरेज और बड़ा ही ठोस था कि आप उसकी बिल्कुल भी चिंता न करें।
हम लोग इस फील्ड के अनुभवी हैं, हम बाल से खाल निकालना और तिल को ताड़ बनाना अच्छी तरह जानते हैं ।
अगले दिन गुफा के प्रांगण में बड़े- बड़े कैमरे लग गए और एक विशाल वट वृक्ष के चबुतरे पर सोफे लगा दिए गए तथा सामने सभी जानवरों को जमीनासीन कराया गया।
डिबेट प्रारम्भ हुई, जिसका विषय था कुत्ते- बिल्ली का वैर, क्यों हैं दोनों गैर। महाराज को विषय बड़ा मजेदार लगा। हालांकि इससे भी बड़े और महत्वपूर्ण विषय थे, जैसे- जंगलों की अवैध कटाई, जंगली पशुओं का विनाश, औद्योगिकीकरण का शिकार, जंगल में विलुप्त होती पशु प्रजातियां आदि। परन्तु ऐसे हितकारी मुद्दों में वह मसाला कहां जो इस विषय में था।
एंकर ने कटीली मुस्कान के साथ एक्सपर्ट पैनल का परिचय कराया कि प्रोग्रेसिव फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. लोमड़ी जी, क्राइम विशेषज्ञ श्री नागराज जी, कुत्ता एशोसिएशन के अध्यक्ष श्री डॉगी जी, सेव कैट फाउंडेशन की लीगल एडवाइजर मिस किट्टी जी। आज के जुझारू पैनल का हम अपने लोकप्रिय कार्यक्रम जंगल में खेलमंडल में हार्दिक स्वागत करते हैं।
इतना कहना था कि टीवी पर झलक दिखलाने के लिए आतुर ऑडियंस ने तालियों से जंगल को गुंजायमान कर दिया। एंकर ने पैनल पर अपनी नशीली नजर डाली, जिसका प्रत्येक सदस्य अपना सा प्रतीत हुआ। क्योंकि विषय कोई भी हो इनका आना तय था। सभी हैरान थे पैनल की ज्ञान परिधि और अभिव्यक्ति क्षमता पर। अंधाधुंध तरीके से धुआंधार बोलना तथा बेसिर पैर के तर्क देना इनकी बापौती थी।
एंकर ने पहला सवाल डॉगी से पूछा कि आप बिल्लियों से क्या इसलिए दुश्मनी रखते हैं कि लोग बिल्ली को महाराज कहते हैं और आपको फूफा नहीं कहते है? महाराज इस प्रश्न पर खुश होकर इतनी जोर से दहाड़े कि एंकर ने माइक और पसीना दोनों छोड़ दिए। डॉगी कुछ बोलता कि इससे पहले एंकर ने माइक नागराज के फन में स्पर्श कराकर लोमड़ी के जबड़ों पर दे मारा। इससे पहले कि लोमड़ी कुछ बोलती माइक डॉगी को सूखी हड्डी की तरह थमा दिया गया। यही क्रम लगभग एक घंटा चलता रहा, कैमरामैन कैमरे को घुमा घुमाकर थक गया। महाराज के हंसते- हंसते दर्द होने लगा, जो बुद्धिमान दर्शक थे। उनको टाइम की बर्बादी का आभास होने लगा था।
एंकर ने डॉगी को इस कदर उकसाया कि वह किट्टी के प्रति पर्सनल हो गया। किट्टी ने भागकर पेड़ पर चढ़कर जान बचाई। एक और डिबेट बेनतीजा टीआरपी के लिए संपन्न हो गई।

पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू
असिसटेंट प्रोफेसर
(हिन्दी विभाग जगद्गुरु रामभद्राचार्य)
विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट, उत्तरप्रदेश
टीवी पोस्ट हसवा, फतहपुर(उत्तरप्रदेश)

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