"खोजा बाल निकला लॉकडाउन" - मिरर विशेष

“खोजा बाल निकला लॉकडाउन”

आज जब विश्व के सभी देश चीनी ज़हरीला प्रसाद कोरोना से त्रस्त हैं तब हमारे भारत के अंधविश्वासी लोग तरह-तरह के टोटके और नुस्खे आजमाने में मस्त हैं । भारत में बीमारी बाद में आती हैं लेकिन उन्हें शर्तिया ठीक करने का दावा करने वाले बाबा-ओझा पहले अवतरित हो जाते हैं । कोरोनावायरस अभी भारत में अपने कदम ही रख पाया होगा कि इधर ‘कोरोना बाबा’ की रामबाण ताबीज़ों के सतरंगे पोस्टर सोशल मीडिया के तरल और सचल तरंगजाल पर उछलने लगे । जब तक पुलिस ‘कोरोना बाबा’ को आइसोलेट करती तब इस बाबा का विषाणु तेजी भागकर एक मंत्राचार्य को अपनी गिरफ्त में ले चुका था । अंधविश्वास का विषाणु हिंदू-मुस्लिम के फेर में नहीं पड़ता तभी तो कबीर ने अपनी ज्ञान चाबुक से दोनों की पीठें उधेड़ दी थीं । आचार्य श्री चंद्रयान-टू की भांति गंतव्य तक पहुंचने वाले थे लेकिन ‘कोरोना निवारण यंत्र’ का प्रचार तंत्र फेल होने के कारण अनियंत्रित होकर किसी पुलिस रूपी एलियन के द्वारा धर दबोचे गए ।इन प्रकरणों के बाद वही हुआ जो हर गंभीर समस्या के बारे में हमारे देश में होता है और यह घटना इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित की जाएगी कि जब देश की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटीलेटर पर थीं तथा डॉक्टर वेंटीलेटर की कमी से जूझ रहे थे उस समय देश की जनता अपना धर्म भूलकर धार्मिक पुस्तकों में बाल खोजी अभियान में व्यस्त थी । सोशल मीडिया ऐसे बालान्वेषकों की अविस्मरणीय खोजों से पटी हुई थी । इस संबंध में तरह-तरह की अफवाहें बिना पंखों के अनंत दूरियां तय कर रही हैं । ऐसे महापंडितों को यह भी आभास नहीं है कि, ऐसी हरकतों का परिणाम क्या होगा ?इस तथ्य को जांचने के लिए जो मानस पढ़ना आरम्भ किया तो महाकवि तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस के अयोध्या काण्ड में लॉकडाउन के समय कैसा आचरण करना है इसके संबंध में बहुत सुंदर सीख दी गई है । जब सम्पूर्ण विश्व में राक्षसवाद का बोलबाला था और उसे समाप्त करने का भार भगवान श्री राम के कंधों पर था जिसके निमित्त राम जी वनगमन के लिए तैयार थे उसी समय जगज्जननी सीता जी उनके साथ जाने के लिए जिद्द करने लगती हैं तब उन्हें समझाते हुए कहते हैं-
आपन मोर नीक जौं चहहू । बचनु हमार मानि गृह रहहू ॥
अर्थात् जो अपना और मेरा भला चाहती हो, तो मेरा वचन मानकर घर में ही रहो । भारतीय जनता को भी आपत्तिकाल में गृह निवास करने की शिक्षा इन वचनों से प्राप्त कर लेनी चाहिए । जब भगवान राम की इस सीख का प्रभाव सीता जी पर कम पड़ता दिखा तो उन्होंने धर्म, नीति का प्रलोभन और इतिहास के उदाहरणों के माध्यम से किंचित भय दिखाकर उन्हें घर में ही निवास कराने का प्रयास किया । भगवान राम ने कहा-
गुर श्रुति संमत धरम फलु पाइअ बिनहिं कलेस ।हठ बस सब संकट सहे गालव नहुष नरेस ॥
(मेरी आज्ञा मानकर घर पर रहने से) गुरु और वेद के द्वारा सम्मत धर्म (के आचरण) का फल तुम्हें बिना ही क्लेश के मिल जाता है, किन्तु हठ के वश होकर गालव मुनि और राजा नहुष आदि सब ने संकट ही सहे॥राजा नहुष की कथा तो सर्वविदित है अपने हठ के चलते जब विधि निर्मित नियमों का उल्लघंन किया तो न इधर के रहे और न ही उधर के रहे । इसी तरह का आचरण इस समय जो मनचले या हठधर्मी करते हैं उनकी भी स्थिति नहुष की भांति हो जाती है । आगे न तो गंतव्य तक पहुंच पाते हैं और पीछे से पुलिस विश्वामित्र की तरह डंडा लिए खड़ी रहती है ।भगवान राम ने सीता जी की मनोदशा देखकर अनुमान लगाया उन्हें लम्बे समय के एकाकीपन का भय सता रहा है तो उन्होंने इसके दबाव को कम करने के उद्देश्य से कहा-
दिवस जात नहिं लागिहि बारा । सुंदरि सिखवनु सुनहु हमारा ॥
यानी दिन जाते देर नहीं लगेगी । हे सुंदरी ! हमारी यह सीख सुनो ! ।हम लोग भी भगवान राम के वचनों को आत्मसात कर लें कि इस लॉकडाउन की समयावधि बीतते देर नहीं लगेगी और तब मुक्ति का उत्सव दीप जलाकर करेंगे किन्तु ध्यान रखना कि चीनी पटाखों-झालरों से कोसों दूरी रहे क्योंकि जनता कर्फ्यू के समय हम देख चुके हैं कि जिन लोगों को धन्यवाद ज्ञापन करने के लिए ताली-थाली बजानी थी कुछ लोगों ने ताव में आकर ध्वनि जूलूस निकालकर शक्ति-भक्ति प्रदर्शन कर उन लोगों की मुसीबतों को और भी बढ़ा दिया था ।

पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’

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