आरोग्य मेले ने तोड़ा दशकों पुराना तिलिस्म, अब “आयुर्वेद स्लो नहीं, फ़ास्ट”

सिरोही। सिरोही के नेहरु पेवेलियन (दशहरा मैदान) पर आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के तत्वावधान में चल रहे जोधपुर सम्भाग के चार दिवसीय आरोग्य मेले ने दशकों पुराना तिलिस्म तोड़ दिया । मेले में आयुर्वेद के औषध निर्माताओं से तुरंत आराम देने वाली, बिना दुष्प्रभाव वाली दर्द निवारक औषधियों एवं अन्य बीमारियों  जैसे कि खांसी, जुखाम, बुखार, कब्ज, आदि में काम आने वाली औषधियों एवं वैज्ञानिक युक्ति युक्त रोगोपचार विधाओं (थिरैपी) जैसे कि पंचकर्म, एक्यूप्रेशर, कपिंग, क्षारसूत्र, एक्यूपंक्चर आदि से परिचित हो आमजन ने अनुभव किया कि पहले वे एक तिलिस्म में जी रहे थे कि आयुर्वेद की औषधियां धीरे धीरे अपना असर दिखाती हैं । गैर संक्रामक बीमारियों में पूरी जिन्दगी शरीर पर, लीवर, किडनी, फेफड़ों, जैसे शरीरांगो पर एवं अन्य अति महत्वपूर्ण ग्रन्थियों एवं उनके स्त्रावों पर विपरीत असर डालने वाली दवाओं का उपयोग आजीवन करते रहने की बजाय यदि हजारों वर्षों से विश्व के स्वास्थ्य की रक्षा में मुख्य भूमिका निभाने वाले आयुर्वेद की दवाएं एवं स्वस्थ जीवन शैली पर परामर्श आज विश्व पुनः अपना रहा है।  
       मेले के व्याख्यान सत्र में राजस्थान आयुर्वेद विश्विद्यालय, जोधपुर से सह व्याख्याता डॉ.चन्दन सिंह ने “स्वास्थ्य संरक्षण एवं संवर्धन में घरेलू उपचार” विषय पर बोलते हुए कहा कि हमारी रसोई हमारा घरेलू चिकित्सालय है। यदि हर घर में गिलोय, वासा, तुलसी, आंवला, सहजन जैसे औषधीय पौधों को लगाया जाए एवं उनके बीमारियों में कैसे उपयोग किया जाए तो प्रति व्यक्ति, प्रति परिवार चिकित्सा पर हो रहे व्यय में अवश्य  कमी आएगी। राजस्थान आयुर्वेद विश्विद्यालय, जोधपुर के रसशास्त्र विभाग के डॉ.विजय पाल त्यागी जिन्होंने अपनी राजकीय सेवा में वर्षों सिरोही जिले में अपनी सेवाएँ दी हैं ने आत्ययिक अवस्था में घरेलू चिकित्सा विषय पर व्याख्यान दिया एवं कई कारगर दवाओं को घर पर ही निर्माण करने के सहज तरीकों के बारे में बताया।
मेला प्रभारी डॉ.घनश्याम शर्मा ने बताया कि मेले के प्रवेश द्वार से प्रवेश करने पर बायीं ओर स्टाल संख्या तेरह पर वनौषधीय पौधों की प्रदर्शनी लगी हुई है। स्टाल संख्या चैदह पर सम्भाग के विभिन्न जिलों से आए अधिकारीयों, कर्मचारियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। स्टाल संख्या पन्द्रह पर औषध वितरण कक्ष बनाया गया है, स्टाल संख्या सोलह पर डॉ.पारीजात औदिच्य, डॉ.निधि एवं डॉ.सन्दीप जनरल रोगों हेतु सेवाएँ दे रहे हैं, स्टाल संख्या सत्रह पर डॉ.कांतिलाल माली पंचकर्म सेवाएँ दे रहे हैं, स्टाल संख्या अठारह पर डॉ.कुलदीप सिंह भाटी व् डॉ.उदय प्रताप सिंह , अर्श एवं भगन्दर के क्षार सूत्र  व आयुर्वेद औषधियों द्वारा रोगोपचार कर रहे हैं, स्टाल संख्या उन्नीस पर होम्योपैथी के डॉ.मनीष शर्मा एवं अन्य चिकित्सा अधिकारी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं, स्टाल संख्या बीस पर यूनानी चिकित्सा एवं परामर्श, स्टाल संख्या इक्कीस पर ब्यूटी क्लीनिक में महिलाओं के लिए विशेष आयुर्वेद से सौन्दर्य प्रसाधन हेतु डॉ.नीलम निगम व डॉ.प्रतिभा हैं, स्टाल संख्या बाईस पर योगाचार्यों द्वारा योग विषय पर जानकारी उपलब्ध करवाई जा रही है एवं डॉ.अभिमन्यु सिंह व जालौर के कमलेश पूर्विया एक्यूप्रेशर व अन्य हीट थिरेपी, थर्मल मसाज के माध्यम से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं जिन्हें दर्द के रोगियों द्वारा खासा पसंद किया जा रहा है । औषध निरीक्षक एवं सहायक निदेशक आयुर्वेद डॉ.अनिल परमार ने बताया कि प्रवेश द्वार से प्रवेश करने पर दायीं ओर निजी कम्पनियों नागपाल आयुर्वेद, जागृती आयुर्वेद, एमिल फार्मा, डाबर, ओम मेडिकल, राधा फार्मेसी, धन्वन्तरी फार्मा, आयुकल्प, ओरा(ऊंझा), गोस्वामी फ़ार्मा, रसराज आयुर्वेद फार्मेसी आदि द्वारा अपने उत्कृष्ट औषधीय उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है।यातायात व्यवस्था प्रभारी डॉ.अमर सैनी ने बताया कि मेला स्थल पर दुपहिया एवं चैपहिया वाहनों को पार्क करने हेतु पर्याप्त स्थान निःशुल्क उपलब्ध है। उप निदेशक आयुर्वेद डॉ.सामन्तालाल मीणा ने  बताया  कि आरोग्य मेले में लगभग सभी रोगों के उपचार हेतु औषधियों कि व्यवस्था है एवं  लगभग तीस जड़ी बूटियों से निर्मित रोग प्रतिरोधक काढा भी निःशुल्क वितरित किया जा रहा है।

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