अटका करोड़ों का भुगतान, मुश्किल में ठेकेदार

  • अधूरे पड़े कार्य, श्रमिकों को नहीं मिल रही मजदूरी
  • एक से डेढ़ वर्ष से कई सडक़, भवनों का निर्माण कार्य ठप

प्रदेश में एक डेढ़ वर्ष से सार्वजनिक निर्माण विभाग के साथ, हाइवे ऑथोरिटी, राजस्थान राज्य रोड विकास प्राधिकरण द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों का करीब डेढ़ वर्ष से भुगतान अटका पड़ा है। इस कारण हजारों श्रमिकों को मजदूरी नहीं मिल पा रही है, तो ठेकेदारों के लिए निर्माण सामग्री का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। कुछ कार्य पूर्ण हो गए, तो कई कार्य अधूरे पड़े हैं, मगर न तो पूर्ण हुए कार्यों का भुगतान सरकार द्वारा किया जा रहा है और न ही अधूरे कार्यों की किश्त का भुगतान ठेकेदारों को मिल पाया है। इससे आक्रोशित ठेकेदारों ने जयपुर में सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय में धरना देकर राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। फिर भी सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं हो सका। इसका खमियाजा अधूरी सडक़ों के रूप में आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
राजस्थान पीडब्लूडी कॉन्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर सिरोही, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर, जयपुर सहित प्रदेशभर के ठेकेदार जयपुर में अजमेर रोड पर हसनपुरा स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यालय पर धरना दिया। एसोसिएशन अध्यक्ष रामसिंह शेखावत, महासचिव आरके मिश्रा, उदयपुर संभाग अध्यक्ष बीएस राव ने बताया कि सडक़, भवन के नवनिर्माण व मरम्मत कार्य किए करीब एक वर्ष से ज्यादा समय हो गया। फिर भी विभाग द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा है। ज्यादातर विकास कार्य ठेकेदार द्वारा बैंक से ऋण या अन्य लोगों से उदरत राशि करते हैं और लम्बे समय से सरकार द्वारा भुगतान नहीं करने से ऋण की राशि का ब्याज चुकाना मुश्किल होता जा रहा है। कुछ निर्माण सामग्री बाजार से उदरत में खरीदी जाती है, जिसका भी भुगतान नहीं कर पा रहे हैं और इसी वजह से दुकानदारों ने सामग्री देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते हजारों की कार्य ठप हो गए हैं। सिरोही जिला मुख्यालय की बात करें, तो शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र चौतरफ सडक़ें तार तार हो चुकी है, जिससे गुजरना आमजन के लिए मुश्किल हो गया है। हाइवे व राज्यमार्गों की भी यही हालत बनी हुई है। फिर भी न तो जिम्मेदार महकमे ध्यान दे रहे हैं और न ही राज्य सरकार गंभीर है। इसका खमियाजा आमजन को क्षतिग्रस्त सडक़ों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
जबरन धरने से उठाने पर असंतोष
प्रदेश के सभी जिलों के ठेकेदार जयपुर में सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय में धरना देकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बाद भी विभाग ने पुलिस बुलाकर उन्हें कार्यालय से बाहर निकाल दिया। फिर ठेकेदार कार्यालय परिसर के बाहर धरने पर बैठे। फिर भी उन्हें खदेड़ दिया गया। इस तरह सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं और पूरे प्रदेश के ठेकेदारों में सरकार के प्रति असंतोष व्याप्त हो गया है कि आखिर सरकार द्वारा इस तरह का रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?
ये है प्रमुख मांगें
-आज तक लंबित बिल का पूर्ण भुगतान किया जाए, अन्यथा बैंक ब्याज चुकाया जाए

  • भुगतान में देरी होने पर समय एक्सटेंशन बिना शर्त के दिया जाए और इसकी स्वीकृति के लिए टेंडर सेंक्शन ऑथोरिटी को अधिकृत करें।
  • हर माह की 5 तारीख को एलओसी जारी की जावे।
  • अतिरिक्त, एक्सेस की पावर को पूर्व एसओपी की भांति एक्सईएन, एसई, एसीई व सीई को प्रदान की जाए। इसमें 24 अपे्रल 19 को जारी सीई का पत्र निरस्त किया जाए। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
  • सभी ठेकेदारों से नोमिनी डिक्लेयरेशन फॉर्म भरवाकर नोमिनी का डिक्लेयरेशन रजिस्ट्रेशन में ही कर दिया जाए, ताकि ठेकेदार की मृत्यु होने पर उत्तराधिकार प्रमाण पत्र में लगने वाला एक वर्ष का समय एवं कानूनी अड़चनों से छुटकारा मिल सकें।
  • सभी श्रेणी के ठेकेदारों की टेंडर डालने की लिमिट महंगाई के अनुपात में बढ़ाए जाए।
  • ठेकेदारों के बिल का भुगतान मासिक आधार पर किया जाए।
  • ठेकेदारों की समस्या निस्तारण के लिए प्रतिमाह जिला व संभाग स्तर पर अभियंताओं के साथ ठेकेदारों की विशेष बैठक तय की जाए।
    -अनुबंध पत्र पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी को कम किया जाए एवं पूर्व की भांति अधिकतम 15 हजार की लिमिट रखी जाए।
  • अनबैलेंस बीड के नियम को समाप्त किया जाए।
  • प्राईज एक्सलेशन में जबरदस्ती शपथ पत्र की प्रक्रिया समाप्त किया जाए। इसका एफ एंड आर रूल्स में कहीं भी जिक्र नहीं है। फिर भी सभी अधिकारी जबरदस्ती शपथ पत्र लेते हैं। सरकारी पार्ट में जो टाइम एक्सटेंशन होता है। उस पीरियड के टाइम एक्सटेंशन पर विभाग ठेकेदार से शपथ पत्र प्राइज एक्सलेेशन नहीं लेने पर बाबत लिया जाता है व अगर प्राइज एक्सलेशन ऋणात्मक में होता है, तो विभाग ठेकेदार से रिकवरी करता है। यह प्राकृतिक न्याय के विपरीत है।
    -प्राइज एक्सीलेशन के नियमों को केन्द्र सरकार/ सीपीडब्लूडी/ एनएचएआई की तर्ज पर संशोधित किया जाए।

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